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तिरुपति मंदिर में दान का नया रिकॉर्ड, एक दिन में 97 करोड़ के चढ़ावे की क्या रही वजह?

तिरुपति बालाजी मंदिर में नई डोनर पॉलिसी लागू होने से पहले श्रद्धालुओं ने रिकॉर्ड दान दिया. महज 24 घंटे में मंदिर को 96.98 करोड़ रुपये मिले, क्योंकि पुराने नियमों के तहत आजीवन सुविधाएं सुरक्षित करने की होड़ मच गई.

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तिरुपति मंदिर में दान का नया रिकॉर्ड, एक दिन में 97 करोड़ के चढ़ावे की क्या रही वजह?
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: तिरुमला स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर में एक दिन में मिले रिकॉर्ड दान ने सभी का ध्यान खींच लिया. शुरुआत में यह बढ़ी हुई धार्मिक आस्था का असर लगा, लेकिन बाद में इसकी असली वजह सामने आई. तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की नई डोनर पॉलिसी लागू होने से पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पुराने नियमों के तहत मिलने वाली आजीवन सुविधाओं को सुरक्षित रखने के लिए दान दिया. इसी कारण मंदिर की आय ने नया रिकॉर्ड बना दिया.

नई पॉलिसी से पहले उमड़े दानदाता

मंगलवार को मंदिर में 2,460 श्रद्धालुओं ने दान दिया और कुल राशि 96.98 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. इनमें बड़ी संख्या ऐसे दानदाताओं की रही जिन्होंने एक लाख से 25 लाख रुपये तक का योगदान दिया. वहीं दो श्रद्धालुओं ने एक-एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि अर्पित की. एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में दान मिलने से मंदिर प्रशासन ने रिकॉर्ड संग्रह दर्ज किया.

क्या बदला नई डोनर पॉलिसी में?

15 जुलाई की आधी रात से लागू नई नीति के तहत दानदाताओं को मिलने वाली आजीवन सुविधाएं समाप्त कर दी गई हैं. अब व्यक्तिगत दानदाताओं को विशेष लाभ केवल 20 वर्षों तक और संस्थाओं को 15 वर्षों तक मिलेंगे. साथ ही पुरानी स्लैब व्यवस्था खत्म कर नई श्रेणियां लागू की गई हैं, जिनके आधार पर सुविधाएं तय होंगी.

दर्शन व्यवस्था भी हुई पूरी तरह डिजिटल

नई नीति के अनुसार विशेष दर्शन, सेवाओं और अन्य सुविधाओं का आवंटन अब ऑनलाइन डोनर मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए होगा. पहले कई मामलों में मैन्युअल प्रक्रिया अपनाई जाती थी. इसके अलावा 50 लाख रुपये या उससे अधिक दान देने वालों को मिलने वाली सुप्रभात सेवा की वार्षिक संख्या भी घटाकर एक कर दी गई है.

स्मृति चिह्नों में भी किया गया बदलाव

दानदाताओं को दिए जाने वाले स्वर्ण और रजत स्मृति चिह्नों में भी बदलाव किया गया है. पहले की तुलना में अब कम वजन के स्वर्ण और चांदी के सिक्के दिए जाएंगे. मंदिर प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और सभी श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाना है.

पुराने दानदाताओं को मिलेगा पहले जैसा लाभ

नई नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे पुराने दानदाताओं पर लागू नहीं किया गया है. 15 जुलाई से पहले दान देने वाले श्रद्धालुओं को पहले की तरह आजीवन सुविधाएं मिलती रहेंगी. यही कारण रहा कि नई व्यवस्था लागू होने से पहले हजारों लोगों ने जल्दी-जल्दी दान देकर पुराने नियमों के तहत मिलने वाले विशेषाधिकार सुरक्षित कर लिए.