लोकसभा स्पीकर के आसन पर फेंके गए पर्चे, 8 कांग्रेस सांसदों को पूरे सत्र के लिए किया गया निलंबित
लोकसभा में जनरल नरवणे की किताब पर चर्चा के दौरान कागज उछालने के आरोप में आठ विपक्षी सांसदों को बजट सत्र से निलंबित कर दिया गया है. इसके खिलाफ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कड़ा विरोध जताया है.
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र में मंगलवार को लोकसभा एक राजनीतिक रणक्षेत्र में तब्दील हो गई. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दूसरे दिन विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जोरदार भिड़ंत हुई. नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे के संस्मरणों का उल्लेख करने पर विवाद इतना बढ़ा कि कुछ सांसदों ने आसन की ओर कागज उछाल दिए. इस कृत्य को संसदीय मर्यादा का गंभीर उल्लंघन मानते हुए सरकार ने आठ कांग्रेस सांसदों के खिलाफ निलंबन की कठोर कार्रवाई की.
सदन में अव्यवस्था और आसन की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप में सरकार ने सख्त रुख अपनाया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी सांसदों के आचरण की निंदा करते हुए उनके निलंबन का प्रस्ताव पेश किया. सदन ने ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कर मणिक्कम टैगोर, किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत पडोले, हिबी ईडन, डीन कुरिया कोस, एस वेंकटेशन, गुरजीत सिंह औजला और राजा वारिंग को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया.
जनरल नरवणे की किताब पर टकराव
विवाद की जड़ पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंश रहे. राहुल गांधी ने जब इनका जिक्र किया, तो सत्ता पक्ष ने इसे सदन की परंपराओं के विरुद्ध बताया. सरकार का तर्क है कि संवेदनशील सैन्य संदर्भों का राजनीतिक उपयोग अनुचित है. वहीं विपक्ष का कहना है कि वे केवल सच्चाई सामने लाना चाहते हैं. यह मुद्दा पिछले दो दिनों से सदन की कार्यवाही में लगातार गतिरोध का कारण बना हुआ है.
सदन की कार्यवाही और स्थगन
सांसदों के निलंबन से पहले सदन को हंगामे के कारण दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित किया गया था. जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तब भी विपक्ष का शोर कम नहीं हुआ. इसके बाद किरेन रिजिजू ने निलंबन प्रस्ताव पेश किया. आसन ने घोषणा की कि संसदीय नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई आवश्यक है. इसके तुरंत बाद सदन की कार्यवाही को बुधवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया जिससे लोकतांत्रिक संवाद बाधित हुआ.
मकर द्वार पर विपक्ष का आक्रोश
निलंबन की कार्रवाई के तुरंत बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर मोर्चा खोल दिया. कांग्रेस सांसदों ने इस कदम को तानाशाही करार देते हुए जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शन के दौरान न केवल निलंबन को वापस लेने की मांग की गई, बल्कि भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट के खिलाफ भी आवाज उठाई गई. विपक्ष का कहना है कि सरकार उनकी आवाज दबाने के लिए निलंबन का सहारा ले रही है.