नई दिल्ली: बिहार सरकार ने जातीय जनगणना की रिपोर्ट जारी कर दी है. इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद बिहार की सियासत और सामाजिक ताने- बाने में व्यापक स्तर पर परिवर्तन की चर्चा विमर्श के केंद्र में है. तमाम चर्चाओं और परिचर्चाओं के बीच समाज का एक तबका किन्नर समाज के अंदर नराजगी देखने को मिली है. बिहार सरकार जहां इस मुद्दे पर अपनी सरकार की पीठ थपथपाते नहीं थक रही है, वहीं ट्रांसजेंडर समुदाय ने जातीय जनगणना के आंकड़ों को फर्जी बताया है. किन्नर समाज का मानना है कि जातीय गणना के दौरान सरकार ने उनसे किसी तरह का कोई ब्योरा नहीं लिया. जो उनके साथ सरासर अन्याय है.
जातीय जनगणना का रिपोर्ट सामने आने के बाद आने के बाद ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता रेशमा प्रसाद ने इंडिया डेली लाइव से बातचीत में अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए दावा किया कि "जातीय गणना प्रक्रिया के दौरान उनसे ब्यौरा नहीं लिया गया. जो सर्वे रिपोर्ट जारी किया गया है उसमें बताया गया है कि बिहार में 825 किन्नर हैं. यह आंकड़ा पूरी तरह गलत है. अकेले पटना में ढाई से तीन हजार किन्नर रहते हैं. बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और टोल प्लाजा के पास इससे ज्यादा किन्नर दिख जाएंगे. सरकार की ओर से जारी किये गए आंकड़े को किन्रर समाज स्वीकार नहीं करेगा. बिहार सरकार ने हमारे साथ भेदभाव और अन्याय किया है. हमारी बिहार सरकार से अलग से मांग है कि हमारी गणना करायी जाए, ताकी हमारा भी सही आंकड़ा सामने आए और सरकार की योजनाओं का हमें लाभ मिल सके"
जातीय सर्वेक्षण में ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता रेशमा प्रसाद का नाम नहीं होने की वजह से उन्होंने पटना उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर किया है. उन्होंने कहा कि बिहार सरकार का दावा है कि ट्रांसजेंडर लोगों की आबादी केवल 825 है, जबकि 2011 की जनगणना में हमारी आबादी 42,000 से अधिक थी. जातीय सर्वेक्षण अधिकारियों ने बिहार में सभी ट्रांसजेंडरों की पहचान नहीं की. मेरी तो गिनती भी नहीं हुई, किसी ने मुझसे मेरी जाति के बारे में नहीं पूछा. ट्रांसजेंडर लोग शुभ अवसरों पर लोगों को आशीर्वाद देते हैं, लेकिन अगर उनके साथ अन्याय होता है, तो वे शाप भी देते हैं.
रेशमा प्रसाद की ओर से इस मुद्दे को मुखरता से उठाए जाने के बाद अब राजनीतिक दलों का समर्थन मिलने लगा है. राष्ट्रीय लोक जनता दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी दावा किया था कि मतगणना के दौरान उनकी जाति और अन्य विवरण पूछने के लिए कोई भी उनके पास नहीं पहुंचा. जो किन्नर समाज के साथ नाइंसाफी है.
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