लोकसभा में आज पेश किया जा रहा CAPF विधेयक, जानें क्यों खास है ये बिल; राज्यसभा में विपक्ष ने क्यों किया था वॉकआउट?
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज यानी 2 अप्रैल को लोकसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक, 2026 पेश कर रहे हैं. आइए जानते हैं क्या कहता है सरकार का ये नया विधेयक और इसपर क्यों विपक्ष हंगामा कर रहे हैं.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज यानी गुरुवार को लोकसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक, 2026 पेश करने जा रहे हैं. इस विधेयक को बुधवार को राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट के बीच पारित किया जा चुका है. विधेयक में उच्च पदों पर प्रतिनियुक्ति को बढ़ावा देने के प्रावधान हैं, जिसे विपक्ष सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले के विरुद्ध बता रहा है.
विधेयक के अनुसार, CAPF में इंस्पेक्टर जनरल यानी IG रैंक के 50 प्रतिशत पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाएंगे. एडिशनल डायरेक्टर जनरल यानी ADG रैंक के कम से कम 67 प्रतिशत पद भी डेप्युटेशन से भरे जाएंगे. इसके अलावा स्पेशल डायरेक्टर जनरल और डायरेक्टर जनरल के सभी पद केवल प्रतिनियुक्ति अधिकारी द्वारा ही भरे जा सकेंगे.
सरकार का क्या है तर्क?
सरकार का कहना है कि यह प्रावधान CAPF बलों को बेहतर प्रशासनिक नेतृत्व और समन्वय प्रदान करेगा. हालांकि विपक्षी दल इस इस विधेयक का पुरजोर विरोध कर रहे हैं . राज्यसभा में बुधवार को चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट किया. उन्होंने कहा कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के 2025 के उस महत्वपूर्ण फैसले के खिलाफ है, जिसमें अदालत ने CAPF के सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड स्तर पर प्रतिनियुक्ति पदों को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने दो साल की अधिकतम सीमा के भीतर इन पदों को घटाने की बात कही थी. देश की आंतरिक सुरक्षा में CAPF का अहम योगदान है.
क्या कहता है नियम?
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में दो तरह के अधिकारी काम करते हैं. पहली श्रेणी में IPS अधिकारी आते हैं, जो डेप्युटेशन पर कुछ वर्षों के लिए भेजे जाते हैं. दूसरी श्रेणी CAPF कैडर अधिकारी हैं, जिनकी भर्ती UPSC की CAPF Assistant Commandant परीक्षा के माध्यम से होती है. कैडर अधिकारी पूरे करियर CAPF में सेवा देते हैं, जबकि IPS अधिकारी ऊपरी पदों पर आते हैं.
अमित शाह आज CAPF विधेयक के अलावा आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक, 2026 भी पेश करेंगे. यह विधेयक अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी बनाने से संबंधित है. यह विधेयक पहले ही लोकसभा में पारित हो चुका है. इसके अलावा ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्टें दोनों सदनों में पेश की जाएंगी.