कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम सांसद शशि थरूर ने शनिवार को संसद भवन में एक हल्के-फुल्के पल को साझा किया. लोकसभा के स्थगित होने के बाद थरूर ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के साथ एक सेल्फी पोस्ट की और लिखा कि रिजिजू को मानना पड़ा कि उन्हें कोई भी महिला विरोधी नहीं कह सकता. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब एक दिन पहले ही सरकार का महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में गिर गया था. थरूर ने इस मौके पर महिलाओं को ‘मानव 2.0’ बताते हुए उनके लिए अधिक प्रतिनिधित्व की वकालत भी की.
शशि थरूर ने एक्स पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें लोकसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद विपक्षी सांसदों का एक समूह किरेन रिजिजू के साथ हंसते-मुस्कुराते हुए नजर आ रहा है. थरूर ने लिखा, “लोकसभा में स्थगन के बाद विपक्षी सांसदों का हमारे आकर्षक संसदीय कार्य मंत्री के साथ छोटा-सा जमावड़ा.” उन्होंने आगे बताया कि जब रिजिजू यह समझा रहे थे कि उनकी पार्टी विपक्ष को ‘महिला विरोधी’ क्यों कह रही है, तो उन्हें (थरूर को) यह बताया गया कि उन पर ऐसा आरोप नहीं लग सकता. थरूर के अनुसार, रिजिजू को यह बात माननी पड़ी. इस छोटी-सी बातचीत ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा पैदा कर दी है, खासकर तब जब महिला आरक्षण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गहरी खाई है.
A little post-adjournment gathering of Opposition MPs in the LokSabha with our charming Parliamentary Affairs Minister. When @KirenRijiju explained why he & his party were calling the Opposition “mahila virodhi”, it was pointed out to him that no one could ever call me… pic.twitter.com/9iyeJgqvF5
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) April 18, 2026
थरूर ने इस मौके का फायदा उठाते हुए महिला आरक्षण पर अपनी पूरी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा, “आइए, सच मान लें – महिलाएं प्रजाति का बेहतर आधा हिस्सा हैं. वे बेहतर मॉडल हैं: ह्यूमन 2.0. वे संसद और हर संस्थान में प्रतिनिधित्व की हकदार हैं.” हालांकि, उन्होंने एक चेतावनी भी दी. थरूर ने कहा कि महिलाओं की प्रगति को परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, जो उनके अनुसार “शरारती और संभावित रूप से खतरनाक” है और लोकतंत्र को तबाह कर सकता है. उनका यह बयान उस विधेयक के संदर्भ में था, जिसमें सरकार ने 2029 से 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के साथ-साथ लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव रखा था.
गौरतलब है कि शुक्रवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था. मतदान में 298 सांसदों ने इसका समर्थन किया, जबकि 230 ने विरोध किया. संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) न मिल पाने के कारण यह विधेयक हार गया. इसके बाद कांग्रेस ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की ‘साजिश’ की हार बताया. वहीं, किरेन रिजिजू ने इस दिन को ‘काला दिन’ करार दिया और कहा कि जिन पार्टियों ने इस विधेयक को रोका, उन्हें देश की महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा. रिजिजू ने कहा, “यह कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर एक काला दाग है, जिसे वे कभी नहीं मिटा पाएंगे.”