menu-icon
India Daily

'2023 वाला कानून लागु हो तो तुरंत करेंगे समर्थन', महिला आरक्षण बिल पर बोलीं प्रियंका गांधी

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े नए बिल की हार के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला तेज किया. प्रियंका गांधी ने पुराना बिल लागू करने की मांग उठाई, जबकि सरकार ने विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया.

KanhaiyaaZee
'2023 वाला कानून लागु हो तो तुरंत करेंगे समर्थन', महिला आरक्षण बिल पर बोलीं प्रियंका गांधी
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति में नया टकराव देखने को मिल रहा है. लोकसभा में सरकार का संविधान संशोधन बिल पास न हो पाने के एक दिन बाद विपक्ष ने आक्रामक रुख अपना लिया है. कांग्रेस नेता प्रियंका ने सरकार को खुली चुनौती देते हुए पुराने महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू करने की मांग की है. इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जिससे आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल और गरमा गया है.

प्रियंका गांधी ने सरकार से कहा कि वह 2023 में सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू करे. उन्होंने साफ कहा कि यदि सरकार सच में महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर है, तो संसद में बिल लाकर दिखाए. उन्होंने विपक्ष को महिला विरोधी बताने के आरोपों को भी खारिज किया.

पुराने कानून पर जोर

जिस कानून की बात हो रही है, वह 2023 में पारित 33 प्रतिशत महिला आरक्षण से जुड़ा है. इस कानून को लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन की शर्त रखी गई थी. विपक्ष का कहना है कि यही शर्त असली बाधा है और इसे हटाकर कानून को तुरंत लागू किया जाना चाहिए.

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है. उनका कहना है कि कुछ राज्यों में चुनाव से पहले विपक्ष को महिला विरोधी दिखाने की कोशिश की जा रही है. तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के दलों ने भी बिना परिसीमन के आरक्षण लागू करने की वकालत की है.

संसद में टकराव और बयानबाजी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि नए बिल में परिसीमन को जोड़कर दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित करने की कोशिश की गई. वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर ऐतिहासिक सुधार को रोकने का आरोप लगाया.

आगे की राह और अनसुलझे सवाल

इस पूरे विवाद के बीच कई अहम सवाल अभी भी अनसुलझे हैं. खासकर ओबीसी महिलाओं के लिए अलग आरक्षण का मुद्दा चर्चा में है. विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए, जबकि परिसीमन जैसे जटिल मुद्दों पर अलग से चर्चा होनी चाहिए. आने वाले समय में यह मुद्दा और गहराने के संकेत दे रहा है.