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4 महीने बाद सजने वाला था सेहरा, पर तिरंगे में लिपटा देखा बेटे का चेहरा... पत्थर हुई आंखें, जानें पुंछ शहीदों की कहानी

कश्मीर के पुंछ जिले में आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों में से दो की आने वाले समय में शादी होने वाली थी. लेकिन शहीद होने की खबर ने दोनों ही परिवारों में कोहराम की स्थिति कर दी है.

Naresh Chaudhary

Poonch Martyred Army Soldiers Story: कश्मीर के पुंछ जिले में गुरुवार को आतंकवादियों ने अपनी कायरता दिखाई. घात लगाकर सेना के काफिले पर हमला किया. इसमें भारतीय सेना के जवान शहीद हो गए. सेना की ओर से अब इन जवानों के पार्थिव शरीरों को उनके पैतृक गांव भेजा जा रहा है. शहीदों में से दो जवानों की आने वाले दिनों में शादी होने वाली थी. परिवार वाले शादी के तैयारियों में जुटे थे. लेकिन सिर पर सेहरा सजने से पहले जवान तिरंगे में लिपटे हुए आए. इसे देख परिवार वालों की छाती फट गई. माता-पिता और जवानों की मंगेतरों का रो-रोकर बुरा हाल है. जानते हैं हमले में शहीद चार जवानों की कहानी...

कोटद्वार के रहने वाले थे गौतम कुमार, 11 मार्च को होनी थी शादी

पुंछ में गुरुवार को आतंकी हमले में कोटद्वार (उत्तराखंड) निवासी गौतम कुमार शहीद हो गए. कोटद्वार के शिवपुर आमपड़ाव के रहने वाले गौतम कुमार महज 28 साल के थे. बताया गया है कि गौतम कुमार दो भाई थे. उनके बड़े भाई ने बताया कि कुछ समय पहले ही गौतम छुट्टी लेकर घर आए थे. 16 दिसंबर को छुट्टियां खत्म हो गई थी, तो उन्होंने ड्यूटी ज्वॉइन कर ली. भाई ने बताया कि हमने गौतम की शादी तय की थी. अगले साल 11 मार्च को उसके सिर पर सेहरा सजने वाला था. लेकिन अब उसका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ आया है. 

दोनों मासूम बच्चियों से फरवरी में आने की किया था वादा

आतंकियों के हमले में शहीद होने वाले सेना के दूसरे जवान करण सिंह यादव थे. करण सिंह उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी थे. यहां के चौबेपुर स्थित भाऊपुरा गांव में उनका परिवार रहता है. परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो मासूम बच्चियां हैं. परिवार वालों ने बताया कि आखिरी बार करण अगस्त में छुट्टी पर गांव आए थे. अब उन्हें अगले साल फरवरी में घर आना था, लेकिन उनकी यूनिट से उनके शहीद होने की खबर आई. इस खबर के आने के बाद उनके परिवार समेत पूरे गांव में मातम छा गया गया है. 

चंदन कुमार के शहीद होने की खबर से परिवार में कोहराम

हमले में शहीद हुए तीसरी जवान नवादा के वारिसलीगंज निवासी रायफलमैन चंदन कुमार हैं. बताया गया है कि चंदन कुमार तीन भाई थे. बड़े भाई का नाम जीवन कुमार और छोटे भाई का नाम अभिनंदन कुमार है. चंदन दूसरे नंबर के भाई थी. परिवार वालों ने बताया कि वे साल 2017 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे. जब परिवार वालों को उनके शहीद होने की सूचना मिली तो कोहराम मच गया. परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है. 

रवि कुमार राणा का तय हो चुका रिश्ता, अब सदमे में मंगेतर 

वहीं चौथे शहीद जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ा के रहने वाले रवि कुमार राणा हैं. रवि कुमार के पिता एक किसान हैं. जबकि रवि के बड़े भाई भी सेना में जवान हैं और पंजाब में उनकी तैनाती है. परिवार वालों ने बताया कि 26 साल के रवि करीब सात साल पहले सेना में भर्ती हुए थे. परिवार वालों ने रवि का रिश्ता तय किया था. आने वाले दिनों में रवि की शादी थी. लेकिन उनके शहीद होने की खबर से उनके और उनकी मंगेतर के परिवार में शोक की लहर फैला दी है.