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दिल्ली-बंगाल में ISIS-अल-कायदा के बड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़! 12 संदिग्ध गिरफ्तार, विजयवाड़ा के 3 युवक मुख्य आरोपी

आंध्र प्रदेश पुलिस ने आतंकवाद से जुड़े बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. बहु-राज्यीय अभियान में 12 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें विजयवाड़ा के तीन युवक शामिल हैं. ये अल-कायदा और ISIS से जुड़े विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए राहत की खबर है. आंध्र प्रदेश पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर एक बड़े आतंकी नेटवर्क को पकड़ा है. दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों में समन्वित छापेमारी के दौरान कुल 12 लोगों को हिरासत में लिया गया. इनमें से तीन विजयवाड़ा के रहने वाले हैं जो युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और जिहादी गतिविधियों में शामिल थे. पुलिस का कहना है कि ये विदेशी हैंडलर्स के निर्देश पर काम कर रहे थे. जांच अभी जारी है.

विजयवाड़ा के तीन आरोपी

पुलिस ने विजयवाड़ा से मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ (23), मिर्जा सोहेल बेग (23) और मोहम्मद दानिश (27) को गिरफ्तार किया. रहमतुल्लाह बाइक टैक्सी चलाता था, सोहेल रेस्तरां में काम करता था और दानिश लेजर मार्किंग का काम करता था. इन तीनों ने अल मलिक इस्लामिक यूथ नाम का ग्रुप बनाया था जिसका मकसद युवाओं को चरमपंथी विचारधारा से प्रभावित करना था.

सोशल मीडिया पर चरमपंथी गतिविधियां

रहमतुल्लाह सोशल मीडिया पर अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेताओं के भाषण देखता और शेयर करता था. उसने दानिश और सोहेल के साथ मिलकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जिहाद से जुड़ी सामग्री फैलाने का काम किया. ये लोग ओसामा बिन लादेन के वीडियो देखते, राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करते और भारत को इस्लामी राज्य बनाने की बातें करते थे.

विदेशी हैंडलर्स से संपर्क

रहमतुल्लाह ने अल-हकीम शकूर नामक विदेशी हैंडलर से संपर्क बनाया था. इसके अलावा ये लोग ISIS से जुड़े बेनेक्स कॉम समूह के सदस्यों से भी जुड़े थे. अन्य गिरफ्तार लोगों में बिहार, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और राजस्थान के संदिग्ध शामिल हैं. ये पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आतंकवादी प्रशिक्षण लेने की योजना बना रहे थे.

पुलिस की आगे की जांच

पुलिस ने बताया कि आरोपियों पर विदेशी हैंडलर्स के निर्देश पर काम करने, चरमपंथी सामग्री फैलाने और गजवा-ए-हिंद की अवधारणा पर काम करने के आरोप हैं. युवाओं को पाकिस्तान भेजकर ट्रेनिंग दिलाने की कोशिश भी की जा रही थी. अतिरिक्त कड़ियों की पहचान के लिए जांच तेज कर दी गई है ताकि पूरा नेटवर्क समाप्त किया जा सके.