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'शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वालों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं ले सकते',  सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया कि वह यह सुनिश्चित करें कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वाले किसी भी नागरिक को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वालों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं ले सकते',  सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
Courtesy: Pinterest

रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया कि वह यह सुनिश्चित करें कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वाले किसी भी नागरिक को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए. कोर्ट ने कहा कि किसी को भी हिरासत में लेने के लिए कानून का पालन होना चाहिए. कोर्ट का यह आदेश तब आया है जब पुलिस पर  SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में लेने के आरोप लगे हैं. अदालत ने कहा कि कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अलावा शांतिपूर्वक प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जा सकता है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो भारतीय न्याय सहिंता की धारा 163 के दायरे से बाहर हैं.

जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ ने यह भी निर्देश दिया की सार्वजनिक व्यवस्थआ बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रतिबंधों को छोड़कर मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहें. बेंच ने कहा कि कानून के अनुसार इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रूप से चलती रहनी चाहिए. साथ ही कोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया कि कानूनी प्रतिबंधों और यातायात संबंधी आवश्यकताओं के अधीन लोगों और यातायात की निर्बाध आवाजाही की अनुमति दें.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व में दिए आदेशों के कथित उल्लंघन को लेकर केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और डीएमआरसी को भी नोटिस जारी किया, जिसमें कोर्ट ने प्रोटेस्ट के बीच यातायात की सेवाओं पर पाबंदी को लेकर चिंता जतायी थी.

कोर्ट ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट परिसर में और उसके चारों धारा 163 लागू करने वाले नोटिसों को हटाने का भी निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि वकीलों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से नहीं रोका जाना चाहिए.

बता दें कि शनिवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाइयों जैसे नेताओं, वकीलों, पत्रकारों और सामान्य नागरिकों की अवैध हिरासत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने विशेष सुनवाई की. याचिकाओं में वकीलों और पत्रकारों के के कथित उत्पीड़न, इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदीं और 45 मेट्रो स्टेशनों के बंद किए जाने जैसे मुद्दे उठाए गए थे.

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने उन पाबंदियों से राहत की मांग की, जो कथित तौर पर प्रदर्शन वाले स्थल जंतर-मंतर पर लोगों को जाने से रोकने के लिए लगाई गई थीं. उन्होंने ट्रेन सेवाओं को बाधित करने, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने को लेकर भी चिता व्यक्त की और कहा कि लोगों को कानूनी प्रतिबंधों के अधीन शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने की अनुमति दी जानी चाहिए.

बेंच ने अधिकारियों को कानून व्यवस्था और यातायात की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बैरिकेड्स की समीक्षा करने को कहा. कोर्ट ने डीएमआरसी से उस नक्शे की भी मांग की जिसमें खुले और बंद मेट्रो स्टेशनों को दर्शाया गया है.

क्या बोली सरकार

दरअसल, सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि शनिवार  रात 10 बजे तक सभी मेट्रो स्टेशन खुल हुए थे और इंटरनेट सेवा बहाल थी. कोर्ट ने कहा कि मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होनी चाहिए जब तक सार्वजनिक व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए प्रतिबंधों की जरूरत न हो.

याचिकाओं में अवैध हिरासत और पुलिस की ज्यादतियों का आरोप

याचिकाओं में पुलिस प्रतिबंधों की वैधता और सीमा को लेकर भी चिंता जताई गई. एक याचिका में आरोप लगाया गया कि अधिकारियों ने कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन किया है जिसमें उसने दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंधों के  लिए मना किया था. अन्य याचिकाओं में नेताओं और अधिवक्ताओं की निवारक हिरासत और वकीलों और पत्रकारों के खिलाफ बल के प्रयोग का मुद्दा भी उठाया गया.

बेंच ने कहा कि सरकार को अवैध हिरासतों, अत्यधिक बल प्रयोग और वैधानिक कर्तव्यों के उल्लंघ के आरोपों का जवाब देना होगा. मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी. सरकार द्वारा मंगलवार तक आरोपों का जवाब देने की उम्मीद है.