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'अब सीधे अधिकारी नपेंगे...', दिल्ली-NCR के अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा प्रहार!

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में अवैध निर्माण और हालिया हादसों पर नाराजगी जताते हुए एमसीडी और अधिकारियों को फटकार लगाई है तथा IIT दिल्ली के विशेषज्ञों से जांच कराने के आदेश दिए हैं.

ani
Sagar Bhardwaj

देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों (NCR) में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि अवैध निर्माण के मामलों में अधिकारी सिर्फ 'खानापूर्ति' (फेस-सेविंग एक्सरसाइज) कर रहे हैं. कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हर बार सिर्फ बिल्डरों पर कार्रवाई की जाती है, जबकि उन इलाकों के जिम्मेदार अधिकारियों को छुआ तक नहीं जाता, जिनकी नाक के नीचे यह सब खेल चलता है.

मासूमों की जा रही जान, सो रहे अधिकारी

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में हाई कोर्ट की रोक के बावजूद एमसीडी के अधिकारियों की मिलीभगत से धड़ल्ले से अवैध निर्माण का काम किया गया. हाल ही में साकेत में इमारत गिरने, मालवीय नगर और लखनऊ के अलीगंज में लगी भीषण आग का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि इन हादसों में कई मासूमों की जान चली गई, लेकिन अधिकारियों की नींद नहीं खुली. साकेत हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी, जहां नियमों को ताक पर रखकर अतिरिक्त मंजिलें बनाई जा रही थीं.

हकीकत जानने के लिए IIT की टीम गठित

अदालत ने साफ चेतावनी दी है, 'अब हम ऐसा आदेश पास करेंगे जो बहुत से लोगों को चुभेगा. इसके लिए अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा.' जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने IIT दिल्ली के दो सीनियर प्रोफेसरों और दो ड्राफ्ट्समैन की एक विशेष निरीक्षण टीम बनाने का निर्देश दिया है. यह टीम दिल्ली के साकेत, लाजपत नगर, मालवीय नगर और लखनऊ के अलीगंज इलाके का दौरा कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. इसके साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से भी अवैध निर्माणों पर की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा मांगा है.