दिल्ली-एनसीआर में हर साल गंभीर होते जा रहे वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. बुधवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि अब तक प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कदम नाकाम साबित हुए हैं.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि समस्या का समाधान केवल अस्थायी उपायों से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और चरणबद्ध योजना से ही संभव है.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण अब एक सालाना संकट बन चुका है. अदालत ने माना कि सरकारें हर साल आपात उपाय करती हैं, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि मौजूदा कदम 'टोटल फेल्योर' साबित हुए हैं और इससे जनता को कोई स्थायी राहत नहीं मिल पा रही है.
बच्चों की सेहत को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि स्कूल बंद करना या हाइब्रिड मॉडल लागू करना केवल अस्थायी राहत है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि सर्दियों में वैसे भी स्कूल 10 से 15 दिन बंद रहते हैं, इसलिए इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए अब दीर्घकालिक सोच अपनानी होगी. अदालत के अनुसार, हर साल तात्कालिक प्रतिबंध लगाकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए चरणबद्ध और ठोस रणनीति लागू करनी होगी, जिससे आने वाले वर्षों में हालात सुधर सकें.
सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को दीर्घकालिक उपायों पर दोबारा विचार करने को कहा. अदालत ने शहरी परिवहन, पराली जलाने पर नियंत्रण, निर्माण गतिविधियों का नियमन, उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे मुद्दों पर ठोस योजना बनाने का निर्देश दिया. साथ ही, नागरिक जागरूकता और मजबूत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली पर भी जोर दिया गया.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पुराने और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को लेकर बड़ा फैसला लिया. अदालत ने BS-III और उससे नीचे के मानकों वाले एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों को दी गई सुरक्षा समाप्त कर दी. यह आदेश CAQM की सिफारिश पर दिया गया, जिससे प्रदूषण पर लगाम लगाने की दिशा में सख्ती बढ़ने के संकेत मिले हैं.