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'इंद्र देव के भरोसे से क्या मतलब..', आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को लताड़ा

Supreme Court on Uttarakhand government: उत्तराखंड में लगी भीषण जंगल की आग पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि बारिश का इंतज़ार करना इस समस्या का हल नहीं है. जंगल की आग को बुझाने के लिए अधिकारियों को ठोस कदम उठाने होंगे.

India Daily Live

Supreme Court on Uttarakhand government: उत्तराखंड में बेकाबू हो रही जंगल की आग पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने साफ किया कि बारिश का इंतजार करना इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं है. जंगल की आग को बुझाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और सक्रिय कदम उठाए जाने चाहिए.

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पिछले नवंबर से राज्य में आग लगने की 398 घटनाएं दर्ज की गई हैं. उत्तराखंड सरकार का दावा है कि ज्यादातर आग जानबूझकर लगाई गई हैं और उन्होंने इस संबंध में 388 मामले दर्ज कर 60 लोगों को गिरफ्तार किया है.

कोर्ट को राजी नहीं कर पाई सरकार की दलील

उत्तराखंड सरकार के उप-महान्यायाधिवक्ता जतिंद्र कुमार सेठी ने यह भी कहा कि आग की चपेट में आने वाला वन्यजीव क्षेत्र कुल वन क्षेत्र का केवल 0.1 प्रतिशत है. उन्होंने जंगल की आग को प्राकृतिक आपदा न बताकर मानवीय हस्तक्षेप को इसका कारण बताया. लेकिन, मानवीय हस्तक्षेप की दलील कोर्ट को राजी नहीं कर पाई. 

जजों का कहना था कि सरकार को सिर्फ बादल बनाने की कृत्रिम प्रक्रिया (क्लाउड सीडिंग) पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि ये टेम्परॉरी उपाय दीर्घकालिक समाधान नहीं हो सकते.

जजों ने टिप्पणी करते हुए कहा,'इंद्र देव की कृपा का इंतजार कर रहे हैं क्या.. बादल बनाने या बारिश के भरोसे मत रहिए, याचिकाकर्ता यह कहने में सही हैं कि आपको जंगलों में आग लगने से रोकने के लिए निवारक उपाय करने होंगे."

आग लगने की घटनाओं को हल्के में ले रही है राज्य सरकार

जलती आग और उसके प्रभावों पर और चिंता जताते हुए, सुनवाई के दौरान पीठ ने वकील से पूछा कि आग की वजह से कितने लोगों की जान गई है. जवाब मिला कि पांच लोगों की दुखद मृत्यु हुई है. मामले में शामिल होने की अर्जी लगाने वाले एक वकील ने अदालत के सामने एक अलग ही तस्वीर पेश की. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार मामले को "बहुत हल्के में" ले रही है. 

उन्होंने दावा किया कि मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि आग बुझाने में लगे दमकल कर्मचारी और वन विभाग के अन्य दल चुनाव संबंधी कार्यों में व्यस्त हैं. उन्होंने कहा, "स्थिति दयनीय है. आग बुझाने जाने वाले लोगों के पास उचित उपकरणों की भी कमी है."

15 मई तक अदालत ने स्थगित की कार्रवाई

चिंताओं की गंभीरता को समझते हुए अदालत ने मामले की सुनवाई 15 मई तक के लिए स्थगित कर दी. इस बीच, उत्तराखंड में जंगल की आग पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं. ध्यान देने वाली बात ये है कि इस महीने की शुरुआत में उत्तराखंड के प्रसिद्ध हिल स्टेशन नैनीताल में जंगल की आग रिहायशी इलाके के काफी करीब पहुंच गई थी.

आग पर काबू पाने के लिए कुछ समय के लिए नौका विहार रोकना पड़ा था. भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों और सेना के जवानों को आग बुझाने के लिए तैनात किया गया था.

नैनीताल अपनी खूबसूरत नैनी झील के लिए जाना जाता है. वहां लगी आग जंगल की विनाशकारी क्षमता का एक ज्वलंत उदाहरण है. उत्तराखंड के कई अन्य इलाकों में भी अभी भी जंगल की आग तेजी से फैल रही है. राज्य प्रशासन आग पर काबू पाने और जंगल को होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश कर रहा है.