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शादी के बहाने किया रेप, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की आरोपी पर दर्ज FIR, जानें क्यों?

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाना न्याय का मजाक और कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.

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Edited By: Antima Pal
शादी के बहाने किया रेप, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की आरोपी पर दर्ज FIR, जानें क्यों?

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक व्यक्ति के खिलाफ शादी के बहाने बलात्कार के आरोप में दर्ज FIR को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि शिकायत “झूठ का पुलिंदा” है और आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाना न्याय का मजाक और कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.

कोर्ट ने शिकायतकर्ता के बयानों में अंतर्निहित विरोधाभासों को रेखांकित किया. बेंच ने कहा, “शिकायतकर्ता 30 वर्ष की उच्च शिक्षित महिला है. 2021 की FIR में उसने केवल एक यौन मुठभेड़ का जिक्र किया, जबकि 2022 की FIR में 4-5 ऐसी घटनाओं का उल्लेख है, जो 2021 की FIR से पहले की हैं.” कोर्ट ने आगे कहा, “यह विश्वसनीय नहीं है कि शिकायतकर्ता शादी के झूठे वादे के तहत इन यौन संबंधों का उल्लेख भूल गई या छोड़ दिया.”  

क्या था पूरा मामला
यह मामला तेलंगाना हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका से संबंधित था, जिसमें निचली अदालत ने बलात्कार की शिकायत को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता ने उस्मानिया विश्वविद्यालय के एक सहायक प्रोफेसर के खिलाफ भी इसी तरह की शिकायत दर्ज की थी, जहां वह छात्रा थी.  

शिकायतकर्ता की मंशा पर सवाल
कोर्ट ने शिकायतकर्ता के फोन चैट का हवाला दिया, जिसमें उसने स्वीकार किया कि वह “हेरफेर करने वाली” है और “ग्रीन कार्ड धारक” पाने की कोशिश कर रही थी. बेंच ने नोट किया, “वह कहती है कि अगले व्यक्ति को फँसाना उसके लिए मुश्किल नहीं होगा. उसने यह भी कहा कि वह अपने पीड़ितों को इतना परेशान करती है कि वे उसे छोड़ दें, और वह अगले शिकार की तलाश शुरू कर देती है.” कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता की “आक्रामक” यौन व्यवहार और “जुनूनी स्वभाव” के बारे में जानने के बाद आरोपी का शादी से पीछे हटना उचित था.