राम मंदिर चढ़ावे की कथित हेराफेरी पर सुप्रीम कोर्ट ने बंद की सुनवाई, जानें आगे क्या होगा
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और हेराफेरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा कर दिया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और एसआईटी जांच कर रही है.
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और हेराफेरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई बंद कर दी है. उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है. इसके बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए आगे की कार्रवाई संबंधित निचली अदालत पर छोड़ दी.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम मामले की गहराई से जांच कर रही है. आरोप है कि मंदिर में भक्तों की ओर से दिए गए दान और नकदी की गिनती के दौरान चोरी और हेराफेरी की गई.
जांच के दौरान क्या चला पता?
जांच के दौरान पुलिस और जांच एजेंसियों ने आरोपियों और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों की वित्तीय ट्रैकिंग भी की. अदालत को बताया गया कि जांच में कुछ कर्मचारियों की ओर से बड़ी संपत्तियां खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है. एक मामले में एक कर्मचारी ने कथित तौर पर 50 लाख रुपये की संपत्ति खरीदी थी. इसमें केवल 15 लाख रुपये का भुगतान बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए दिखाया गया, जबकि बाकी रकम के भुगतान को लेकर जांच में सवाल उठे हैं.
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उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट को कानून के मुताबिक आगे की कार्यवाही करने का निर्देश दिया. साथ ही याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने और अदालत की सहायता करने की अनुमति दी गई है.
क्या बोले चीफ जस्टिस सूर्यकांत?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत में दी गई अनुमति का सही तरीके से इस्तेमाल करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि इस अनुमति का सदुपयोग किया जाए और इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के आरोपों की सच्चाई या उसके गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है. अदालत ने कहा कि अब आरोपपत्र और उपलब्ध सामग्री के आधार पर संबंधित निचली अदालत ही कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करेगी.
पांच जजों के फैसले की समीक्षा का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान अयोध्या ट्रस्ट से जुड़े पांच न्यायाधीशों की पीठ के फैसले की समीक्षा के लिए दाखिल एक नई याचिका का मुद्दा भी सामने आया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि पांच जजों की पीठ के फैसले से जुड़े मामले में इस तरह सिविल मुकदमा दाखिल करना उचित कानूनी तरीका नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल चढ़ावा चोरी से जुड़े मामले में अपनी कार्यवाही समाप्त कर दी है. अब आरोपपत्र के आधार पर संबंधित निचली अदालत में आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी.