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Big relief for Anant Ambani Vantara: अनंत अंबानी के वंतारा को SIT ने दी क्लीन चिट, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई थी गठित

एसआईटी ने सोमवार को देश की टॉप अदालत को बताया गया गया कि गुजरात के जामनगर में वंतारा सेंटर द्वारा अपनाए गए अनुपालन और नियामक उपायों से वो संतुष्ट हैं. सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी का गठन किया था.

Hemraj Singh Chauhan

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल ने गुजरात के जामनगर में स्थित वंतारा  प्राणी बचाव और पुनर्वास केंद्र को क्लीन चिट दे दी है. इस एसआईटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस चेलमेश्वर कर रहे थे. एसआईटी ने सोमवार को देश की टॉप अदालत को बताया गया गया कि वंतारा सेंटर द्वारा अपनाए गए अनुपालन और नियामक उपायों से वो संतुष्ट हैं.

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस पंकज मिथल और प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने कहा कि वह सीलबंद रिपोर्ट के निष्कर्षों पर विचार करने के बाद इस मुद्दे पर अपना  फैसला सुनाएगी. कोर्ट ने कहा कि वो सरकारी अधिकारियों को वंतारा के कामकाज को लेकर तब निर्देश देगा, यदि इसके संबंध में कोई सिफारिश या सुझाव आता है.

सुप्रीम कोर्ट ने वंतारा मामले में क्या कहा?

इसके साथ ही देश की सर्वोच्च अदालत ने ये भी स्पष्ट किया कि एक बार जब वो इससे संतुष्ट हो जाएगा कि वंतरा में पशुओं की सुरक्षा से संबंधित सभी कानूनों का पालन किया है. इसके बाद किसी भी पक्ष को रेस्क्यू सेंटर के खिलाफ अनावश्यक आपत्तियां उठाने की अनुमति नहीं देगा.


'हम रिपोर्ट के अनुसार चलेंगे'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले में हमारे पास एक स्वतंत्र समिति(SIT) की रिपोर्ट है.हम उसी के अनुसार चलेंगे. उन्होंने विशेषज्ञों का भी सहयोग लिया है. सभी अथॉरिटीज समिति द्वारा दी गई सिफारिश पर सुझाव लेने के लिए स्वतंत्र होंगे, हम किसी को भी बार-बार आपत्तियां उठाने की अनुमति नहीं देंगे.

वंतारा के खिलाफ क्या थे आरोप?

सुप्रीम कोर्ट में सीआर जया सुकिन ने एक याचिका दाखिल की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि वंतारा में हाथियों, पक्षियों समेत कई लुप्तप्राय प्रजाति के जानवरों को अवैध रूप से लाया गया है. इसमे ये भी आरोप लगाए गए थे कि वन्यजीव संरक्षण कानूनों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन करके जानवरों की तस्करी की गई है.

इन आरोपों की जांच के लिए सआईटी ने अगस्त में वंतारा का दौरा किया. टीम ने सेंटर में तीन दिन बिताए. इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की गई और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों और विभिन्न राज्य वन विभागों से भी कई जानकारी ली गई.