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जम्मू-कश्मीर में इंटर्न डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े

जम्मू-कश्मीर में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल लगातार चौथे दिन जारी है. डॉक्टर ₹12,300 से बढ़ाकर ₹30,000 मासिक स्टाइपेंड करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि करीब सात साल से राशि में बदलाव नहीं हुआ है और अब उन्हें आश्वासन नहीं, लिखित आदेश चाहिए.

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Edited By: Shanu Sharma
Nasir Khan
Reported By: Nasir Khan
जम्मू-कश्मीर में इंटर्न डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े
Courtesy: India Daily

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में MBBS और BDS इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन गुरुवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रहा. प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टरों ने सरकार से उनके मासिक स्टाइपेंड में तत्काल बढ़ोतरी करने और लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर ठोस फैसला लेने की मांग की है.

इंटर्न डॉक्टर मौजूदा ₹12,300 प्रति माह के स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30,000 करने की मांग कर रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड करीब सात वर्षों से संशोधित नहीं किया गया है, जबकि इस दौरान महंगाई बढ़ी है और अस्पतालों में इंटर्न डॉक्टरों की जिम्मेदारियां भी लगातार बढ़ी हैं.

क्या है प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की मांग?

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के कई मेडिकल संस्थानों में इस मांग को लेकर आंदोलन जारी है. इनमें GMC श्रीनगर, GMC बारामूला, GMC हंदवाड़ा, GMC अनंतनाग, GMC जम्मू, GMC उधमपुर, GMC राजौरी, GMC डोडा और SKIMS बेमिना समेत अन्य संस्थान शामिल हैं. प्रदर्शन के दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा नया नहीं है. इसे पिछले कई वर्षों से अलग-अलग स्तरों पर सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया जाता रहा है. डॉक्टरों के अनुसार, वर्ष 2023 में इस मामले की समीक्षा के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था और कमेटी ने स्टाइपेंड में संशोधन की सिफारिश भी की थी.

इंटर्न डॉक्टरों का दावा है कि कमेटी की सिफारिश के बाद प्रस्ताव सरकारी स्तर पर आगे बढ़ा, लेकिन अब भी अंतिम मंजूरी का इंतजार है. डॉक्टरों के मुताबिक, फाइल वित्त विभाग के पास लंबित है और बजट की कमी को देरी की एक वजह बताया जा रहा है. प्रदर्शन में शामिल डॉक्टर तसद्दुक ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से स्टाइपेंड में संशोधन का इंतजार कर रहे हैं, जबकि इंटर्नशिप के दौरान उन्हें अस्पताल के विभिन्न क्लिनिकल क्षेत्रों में लगातार जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं.

उन्होंने कहा कि हम इमरजेंसी विभाग, वार्ड और दूसरे क्लिनिकल क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. कई बार रात की ड्यूटी और लंबे शिफ्ट भी करनी पड़ती हैं. इन जिम्मेदारियों के बावजूद हमें सिर्फ ₹12,300 प्रति माह मिलते हैं. हमारी जिम्मेदारियों और काम के हिसाब से यह राशि पर्याप्त नहीं है. इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों की रोजमर्रा की व्यवस्था में इंटर्न महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वे सीनियर डॉक्टरों और पोस्टग्रेजुएट डॉक्टरों के साथ मिलकर मरीजों की देखभाल में सहयोग करते हैं.

सात सालों से स्टाइपेंड में कोई बदलाव नहीं

डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी ड्यूटी में इमरजेंसी, OPD, वार्ड और अन्य क्लिनिकल क्षेत्रों में काम करने के अलावा रात की ड्यूटी और लंबे समय तक चलने वाली शिफ्ट भी शामिल हैं. अनिवार्य इंटर्नशिप के तहत उन्हें अलग-अलग विभागों में पोस्टिंग भी दी जाती है. एक अन्य इंटर्न डॉक्टर ने कहा कि ₹30,000 स्टाइपेंड की मांग काम के बोझ, बढ़ती महंगाई और देश के कई अन्य राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड को ध्यान में रखते हुए की जा रही है. उन्होंने कहा कि हम कोई अनुचित मांग नहीं कर रहे हैं. हम ₹30,000 स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं, जो हमारे काम के बोझ, महंगाई और दूसरे राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड को देखते हुए भी एक सामान्य मांग है.

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने जम्मू-कश्मीर और दूसरे राज्यों के बीच स्टाइपेंड में अंतर का मुद्दा भी उठाया. उनका कहना है कि देश के कई राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को समान तरह की क्लिनिकल जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद जम्मू-कश्मीर की तुलना में अधिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है. एक अन्य प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टर डॉ. इखलास ने कहा कि करीब सात वर्षों से स्टाइपेंड में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि इंटर्न डॉक्टरों को नाइट ड्यूटी, लंबी शिफ्ट और विभिन्न स्थानों पर पोस्टिंग जैसी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं.

उन्होंने कहा कि हमारा स्टाइपेंड करीब सात वर्षों से नहीं बढ़ाया गया है. हम दूसरे राज्यों के इंटर्न डॉक्टरों की तरह ही क्लिनिकल ड्यूटी करते हैं, जिसमें इमरजेंसी और नाइट ड्यूटी भी शामिल है. इसके बावजूद हमें करीब ₹12,300 ही मिलते हैं, यानी लगभग ₹400 प्रतिदिन. हमारी मांग है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए स्टाइपेंड को ₹30,000 करे. इंटर्न डॉक्टरों ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को कई बार व्यक्तिगत तौर पर अधिकारियों के सामने उठाया और प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से भी सरकार तक अपनी बात पहुंचाई. हालांकि, उनका कहना है कि हर बार उन्हें यही आश्वासन दिया गया कि मामला प्रक्रिया में है. डॉक्टरों के मुताबिक, लगातार हो रही देरी के कारण आखिरकार उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा. प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि जब यह प्रस्ताव पहले ही सरकारी प्रक्रिया से गुजर चुका है, तो अब उन्हें एक और आश्वासन के बजाय अंतिम फैसला चाहिए.

लंबे समय से मामला लंबित

उन्होंने कहा किकमेटी ने स्टाइपेंड में संशोधन की सिफारिश की थी और उसके बाद भी इस मुद्दे को कई स्तरों पर उठाया गया. लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं आया है. हमें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजा जाता रहा, जबकि मामला अब भी लंबित है.

यह आंदोलन ऐसे समय में जारी है जब स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से भी कहा गया है कि इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का प्रस्ताव प्रक्रिया में है. स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने भी इंटर्न डॉक्टरों की मांग को जायज बताया है और कहा है कि संबंधित फाइल वित्त विभाग के पास लंबित है. हालांकि, प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि अब उन्हें सिर्फ मौखिक आश्वासन नहीं बल्कि समयबद्ध फैसला और लिखित आदेश चाहिए. इंटर्न डॉक्टरों ने कहा कि वे यह समझते हैं कि स्टाइपेंड में संशोधन के लिए प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरियां जरूरी हैं, लेकिन उनका सवाल यह है कि जब मामला वर्षों से लंबित है तो अब इसके लिए स्पष्ट समयसीमा क्यों तय नहीं की जा रही है.

एक प्रदर्शनकारी डॉक्टर ने कहा कि हम सरकार का सम्मान करते हैं और समझते हैं कि प्रस्ताव को अलग-अलग स्तरों से मंजूरी मिलनी होती है. लेकिन यह मुद्दा कई वर्षों से लंबित है. अब हम स्पष्ट समयसीमा और औपचारिक आदेश चाहते हैं. जब तक ऐसा नहीं होता, हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा. वहीं, हड़ताल के कारण मरीजों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी इंटर्न डॉक्टरों ने अपना पक्ष रखा. डॉक्टरों का कहना है कि वे मरीजों को किसी तरह की परेशानी में डालना नहीं चाहते और मरीजों की देखभाल से समझौता करना उनका उद्देश्य नहीं है.

उनका कहना है कि अस्पतालों में सीनियर रेजिडेंट और पोस्टग्रेजुएट डॉक्टर मरीजों की देखभाल और इलाज का काम जारी रखे हुए हैं. हालांकि, इंटर्न डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी से अस्पतालों में मैनपावर और काम के बोझ पर असर पड़ने की बात भी प्रदर्शनकारियों ने स्वीकार की. इंटर्न डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री से अपील की है कि वह प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर उनके साथ सीधे बातचीत करें और इस मुद्दे का समाधान निकालें.

मरीजों को हो रही परेशानी 

डॉक्टरों का कहना है कि अगर सरकार को मरीजों की परेशानी की चिंता है, तो उसे प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टरों के साथ बातचीत कर उनकी मांग पर जल्द फैसला लेना चाहिए, ताकि आंदोलन समाप्त हो सके. एक अन्य इंटर्न डॉक्टर ने सरकार पर वर्ष 2023 से लगातार आश्वासन देने लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जब बार-बार अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के बावजूद समाधान नहीं हुआ, तो विरोध प्रदर्शन के जरिए अपनी मांग उठाना उनका अधिकार है. इस बीच, PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के समर्थन में पहुंचीं और उन्होंने इंटर्न डॉक्टरों से मुलाकात की. प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के मुताबिक, महबूबा मुफ्ती ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी मांग को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा और संबंधित अधिकारियों तक मामला पहुंचाया जाएगा.

डॉक्टरों ने कहा कि वे राजनीतिक समर्थन का स्वागत करते हैं, लेकिन इस मुद्दे का अंतिम समाधान सरकार को ही निकालना होगा. प्रदर्शन में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानों के MBBS और BDS इंटर्न डॉक्टर शामिल हैं. डॉक्टरों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार के साथ टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि वर्षों से लंबित उनकी मांग पर एक स्पष्ट और ठोस निर्णय हासिल करना है. फिलहाल इंटर्न डॉक्टरों की मुख्य मांग ₹12,300 से बढ़ाकर ₹30,000 मासिक स्टाइपेंड करने और इस संबंध में औपचारिक सरकारी आदेश जारी करने की है. प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांग पर लिखित और ठोस फैसला नहीं आता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.