महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. शिवसेना (यूबीटी) के हिंगोली सांसद नागेश पाटिल अष्टीकर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का साथ चुना है. लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित टूट की चर्चा जोरों पर है. अष्टीकर ने अपने फैसले के पीछे राजनीतिक परिस्थितियों, विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं और हाल की घटनाओं को जिम्मेदार बताया.
नागेश पाटिल अष्टीकर ने कहा कि 18 जून तक उन्होंने और कुछ अन्य सांसदों ने कोई अंतिम फैसला नहीं किया था. उनके अनुसार वे पार्टी छोड़ने की दिशा में आगे नहीं बढ़े थे, लेकिन उसके बाद जिस तरह की टिप्पणियां उनके और अन्य असंतुष्ट सांसदों के खिलाफ की गईं, उससे उन्हें लगा कि अब पार्टी में बने रहने का कोई अर्थ नहीं रह गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि हालात तेजी से बदले और इसी कारण उन्हें अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नया निर्णय लेना पड़ा. उनका कहना था कि लगातार बढ़ते आरोपों और कटाक्षों ने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया.
अष्टीकर ने अपने फैसले के पीछे विकास कार्यों को सबसे अहम कारणों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहने के कारण क्षेत्र के लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के काम पूरे कराना मुश्किल हो रहा था. उनके मुताबिक जनता ने उन्हें बड़ी उम्मीदों के साथ चुना था और उनकी जिम्मेदारी उन अपेक्षाओं को पूरा करना है. सांसद निधि की सीमित राशि से बड़े विकास कार्य संभव नहीं हो पा रहे थे. उन्होंने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में लगातार प्रयासों के बावजूद अपने लोकसभा क्षेत्र के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाने में सफलता नहीं मिली, जिससे उन्हें यह कदम उठाना पड़ा.
सांसद ने स्पष्ट किया कि उनका फैसला व्यक्तिगत नाराजगी का परिणाम नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से कोई शिकायत नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ नेताओं की ओर से इस्तेमाल की गई भाषा ने स्थिति को और जटिल बना दिया. अष्टीकर ने कहा कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद की मर्यादा बनी रहनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग आज उनके निर्णय से नाराज हैं, वे समय के साथ उनकी परिस्थितियों और मजबूरियों को समझेंगे. उनके अनुसार उन्होंने यह कदम किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि अपने क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखकर उठाया है.
'एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना' जाने का दावा
अष्टीकर ने अपने राजनीतिक बदलाव को विचारधारा से समझौता नहीं बल्कि एक ही राजनीतिक परिवार के भीतर स्थान परिवर्तन बताया. उन्होंने कहा कि वे कहीं और नहीं गए हैं, बल्कि शिवसेना से शिवसेना में ही आए हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी सांसद या नेता पर उनके साथ आने का दबाव नहीं बनाएंगे, लेकिन जो लोग उनके संपर्क में हैं, उनके साथ खड़े रहेंगे. यह घटनाक्रम तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब हाल ही में कई सांसदों ने दिल्ली में हुई पार्टी की संसदीय बैठक से दूरी बनाई थी. इन घटनाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं और संभावित राजनीतिक पुनर्संरचना को जन्म दे दिया है.
बता दें कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के लोकसभा में 9 सांसद हैं. इनमें से यदि एक साथ 6 सांसद दल बदल करते हैं तो वे दल बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बच सकते हैं.