'राहुल-सोनिया-प्रियंका को हटाओ, तभी लौटूंगा'; कांग्रेस में वापसी के सवालों पर शहजाद पूनावाला का तंज
बीजेपी के पूर्व प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस में वापसी की संभावना पर तीखा तंज कसा है. उन्होंने कहा कि राहुल, सोनिया और प्रियंका गांधी के हटने पर ही कांग्रेस में लौटेंगे.
नई दिल्ली: बीजेपी प्रवक्ता पद से इस्तीफा देने के बाद शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी चर्चा बढ़ा दी है. उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस में उनकी वापसी तभी संभव है, जब सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी से हटा दिया जाए. पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए बीजेपी को मौजूदा समय में देश की सबसे बेहतर पार्टी बताया. हालांकि, बीजेपी ने अभी उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया है.
एनडीटीवी से बातचीत में पूनावाला से कांग्रेस में लौटने की संभावना पर सवाल पूछा गया. जवाब में उन्होंने कहा कि वह तभी कांग्रेस में जाएंगे, जब राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को हटा दिया जाए. उन्होंने इसके साथ नेहरू के फैसलों के लिए माफी मांगने की शर्त भी जोड़ी. पूनावाला ने 2017 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था.
मोदी की तारीफ, बीजेपी को बताया बेहतर
पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि देश ने उनसे बड़ा नेता न पहले देखा है और न भविष्य में देखने की उम्मीद है. उन्होंने खुद को भविष्यवक्ता नहीं बताया और कहा कि मौजूदा समय में बीजेपी भारत की सबसे बेहतर राजनीतिक पार्टी है. उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में काम करने के बाद किसी दूसरी पार्टी में जाने का सवाल ही नहीं उठता.
Also Read
पैसे की जरूरत का भी किया जिक्र
बीजेपी छोड़ने के फैसले के पीछे पूनावाला ने आर्थिक कारणों को भी प्रमुखता से बताया. उन्होंने कहा कि राजनीति में काम करने वालों को पार्टियां वेतन नहीं देतीं और उन्हें अपने घर का किराया भी चुकाना पड़ता है. उनके मुताबिक, प्रवक्ता की जिम्मेदारी 24 घंटे और साल के 365 दिन सक्रिय रहने वाली है, लेकिन लंबे समय तक इसे जारी रखना उनके लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं था.
2024 से चल रही थी बदलाव की चर्चा
पूनावाला ने बताया कि बीजेपी में अपनी भूमिका बदलने या निजी क्षेत्र में जाने को लेकर वह 2024 से ही विचार कर रहे थे. 31 जुलाई को उन्होंने सोशल मीडिया प्रोफाइल से बीजेपी का उल्लेख हटाया था, जिसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुई थीं. सोमवार को उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया. हालांकि, पार्टी नेतृत्व की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है.
बोले- विरासत की राजनीति का हिस्सा नहीं
पूनावाला ने अपनी राजनीतिक स्थिति को पहली पीढ़ी के नेताओं से जोड़ते हुए कहा कि वह किसी राजनीतिक परिवार की विरासत से नहीं आते. उन्होंने कहा कि राजनीति में कई नेताओं को पारिवारिक पृष्ठभूमि का लाभ मिलता है, जबकि उनके जैसे नए नेताओं को खुद अपने भविष्य का रास्ता तलाशना पड़ता है. इसी वजह से वह राजनीति के साथ आर्थिक रूप से टिकाऊ विकल्प तलाशने की जरूरत महसूस कर रहे हैं.