भारतीय रेस्टोरेंट में क्या न खाएं? फेमस शेफ संजय गौर ने बताए 9 ऐसे व्यंजन

 प्रसिद्ध शेफ संजय गौर ने 9 ऐसे व्यंजन बताए हैं जिन्हें भारतीय रेस्टोरेंट में कभी भी नहीं खाना चाहिए. इसके पीछे उन्होंने बेहद खास वजह बताई है.

X
Sagar Bhardwaj

क्या आप जानते हैं कि भारतीय रेस्तरां में भोजन चुनना क्यों एक बड़ी चुनौती बन जाता है? किसी भी भारतीय रेस्तरां के मेन्यू में इतने सारे स्वादिष्ट और आकर्षक विकल्प होते हैं कि अक्सर लोग सही व्यंजन का चयन करने में भ्रमित हो जाते हैं. क्या किसी नामचीन शेफ की सलाह आपके लिए मेन्यू से गलत व्यंजन चुनने के जोखिम को कम कर सकती है?

दक्षिण लंदन स्थित 'कोकुम' (KOKUM) रेस्तरां के सह-संस्थापक और प्रसिद्ध शेफ संजय गौर ने कुछ ऐसे व्यंजनों की सूची शेयर की है, जिन्हें रेस्तरां में ऑर्डर करने से बचना चाहिए. मुंबई में पले-बढ़े और मिशेलिन-स्टार रेस्तरां में काम कर चुके शेफ संजय का मानना है कि बिरयानी, लैम्ब्ड और भजिया प्रेमी ग्राहकों को अपने पसंदीदा व्यंजनों को चुनते समय थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए.

1. क्या अत्यधिक लाल दिखने वाला चिकन टिक्का आपकी सेहत और स्वाद के लिए सही है?


शेफ संजय के अनुसार, यदि चिकन टिक्का का रंग गहरा लाल या लगभग फ्लोरोसेंट दिखता है, तो यह खतरे की घंटी है. एक बेहतरीन चिकन टिक्का में तंदूर की आंच से हल्की स्मोकी महक और प्राकृतिक रंग होना चाहिए, न कि अत्यधिक कृत्रिम लाल रंग.

2. क्या कई पन्नों वाले लंबे मेन्यू पेश करने वाले रेस्तरां की गुणवत्ता पर संदेह करना जायज है?

जब किसी रेस्तरां के मेन्यू में हर प्रकार की करी, बिरयानी, ग्रिल और समुद्री भोजन की भरमार होती है, तो शेफ संजय सतर्क हो जाते हैं. उनका मानना है कि कोई भी किचन हर व्यंजन में समान ताजगी और ध्यान नहीं दे सकता, इसलिए सीमित और विशिष्ट व्यंजनों वाले रेस्तरां ही बेहतर विकल्प होते हैं.

3. क्या केवल अत्यधिक तीखेपन के नाम पर विंदालू ऑर्डर करना एक सही फैसला है?

विंदालू को केवल "सबसे तीखा करी" मान लेना इस व्यंजन के साथ अन्याय है. शेफ के मुताबिक, एक अच्छे विंदालू में तीखेपन के साथ-साथ खटास, लहसुन और मसालों का संतुलन होना चाहिए; मिर्च केवल स्वाद का हिस्सा होनी चाहिए, न कि स्वाद बिगाड़ने वाली सजा.

4. क्या करी और चावल का साधारण मिश्रण वास्तव में एक असली बिरयानी कहला सकता है?

असली बिरयानी की पहचान उसकी सुगंध और खिले हुए चावल के दानों से होती है. यदि बिरयानी में चावल और करी को केवल आपस में मिला दिया गया हो, तो वह सही तरीके से तैयार की गई दम बिरयानी नहीं है.

5. क्या पूरी तरह से सपाट और हल्की पकी हुई नान तंदूर की असली ताजगी दे सकती है?

तंदूर से ताजा निकली नान में हल्के जले हुए निशान, कुरकुरे किनारे और हवा के बुलबुले होने चाहिए. यदि नान पूरी तरह से सपाट और हल्की रंगत की दिखे, तो संभावना है कि वह पहले से बनी हुई है और उसे केवल दोबारा गर्म करके परोसा गया है.

6. क्या आधे घंटे तक डिलीवरी बैग में बंद रहने के बाद चाट का असली स्वाद बरकरार रह सकता है?

चाट का असली आनंद उसके कुरकुरेपन और मीठी, खट्टी व तीखी चटनी के ताजा मेल में होता है. इसे डिलीवरी बैग में लंबे समय तक रखने पर यह नरम और बेस्वाद हो जाती है, इसलिए चाट को हमेशा रेस्तरां में ताजा ही खाना चाहिए.

7. क्या ठंडे पड़ चुके या पहले से तले हुए स्नैक्स आपके खाने का अनुभव बिगाड़ सकते हैं?

भजिया और अन्य तले हुए स्नैक्स तभी तक स्वादिष्ट लगते हैं जब तक वे ताजा और गर्म हों. यदि वे पहले से तलकर रखे गए हों और दोबारा गर्म किए गए हों, तो वे अत्यधिक तेल सोख लेते हैं और उनका कुरकुरापन खत्म हो जाता है.

8. क्या हर प्रकार के मांस के लिए एक ही बेस करी इस्तेमाल करने वाले रेस्तरां सही स्वाद दे पाते हैं?

यदि मेन्यू में एक ही करी के साथ चिकन, लैम्ब, झींगा या सब्ज़ियों का विकल्प चुनने को कहा जाए, तो इसका मतलब है कि सॉस पहले से तैयार है और उसमें ऊपर से पकाया हुआ मांस मिलाया जा रहा है. अलग-अलग सामग्री का स्वाद मसालों के साथ धीमी आंच पर पकने से ही उभरता है.

9. क्या अत्यधिक सस्ता लैम्ब करी मांस की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है?

लैम्ब एक महंगा घटक है, और यदि कोई रेस्तरां इसे बहुत कम कीमत पर बेच रहा है, तो इसकी गुणवत्ता या ताजगी पर संदेह होना स्वाभाविक है. गुणवत्तापूर्ण भोजन के लिए थोड़ा अधिक भुगतान करना हमेशा एक बेहतर विकल्प होता है.

10. क्या आप जानना चाहते हैं कि एक टॉप शेफ भारतीय रेस्तरां में खुद क्या ऑर्डर करना पसंद करता है?

शेफ संजय गौर खुद खाना ऑर्डर करते समय रेस्तरां के स्पेशल व्यंजनों, तंदूरी डिशेज़ (जैसे पनीर या लैम्ब चॉप्स), असली दम बिरयानी और सादी दाल (जैसे दाल तड़का या दाल मखनी) को तरजीह देते हैं, क्योंकि यही व्यंजन शेफ के कौशल और संतुलन की असली पहचान कराते हैं.