भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी सुरेश रैना ने शारदीय नवरात्र के पहले दिन हिमाचल प्रदेश में मां बगलामुखी के दर्शन किए. इस दौरान उनकी पत्नी प्रियंका, मां और बहन भी साथ मौजूद रहीं. रैना ने परिवार के साथ मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और मां का आशीर्वाद लिया. उन्होंने मंदिर में दर्शन की तस्वीरें अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी साझा की हैं. इस धार्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश से अपने गहरे जुड़ाव और मां बगलामुखी के प्रति परिवार की आस्था का भी जिक्र किया.
सुरेश रैना ने मंदिर में दर्शन के बाद सभी की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की. उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'ॐ श्री बगलामुख्यै नमः'. रैना की इस धार्मिक यात्रा ने मां बगलामुखी के प्रसिद्ध मंदिर और यहां की पूजा परंपराओं को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.
🙏 जय माँ बगलामुखी! 🕉️ On the auspicious occasion of the first Navratri, had a wonderful darshan of Maa Baglamukhi with my family — my mother, sister and wife. ❤️🌺 A heartfelt thank you to @ianuragthakur Ji for arranging everything and making this divine experience so special. May Maa bless everyone with happiness, peace and prosperity. 🙏🚩#नवरात्रि
— Suresh Raina🇮🇳 (@ImRaina) October 11, 2026
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में पहाड़ियों के बीच स्थित मां बगलामुखी का मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों और धार्मिक आस्था के केंद्रों में गिना जाता है. यहां साल भर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माना जाता है. उन्हें पीतांबरा देवी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां की आराधना करने से शत्रुओं की बाधाओं पर विजय पाने और जीवन की परेशानियों से मुक्ति पाने का आशीर्वाद मिलता है.
मां बगलामुखी मंदिर को लेकर कई प्राचीन धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. मान्यता है कि भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए यहां तपस्या की थी और देवी से आशीर्वाद प्राप्त किया था. यह भी कहा जाता है कि भगवान राम के आदेश पर हनुमान जी और भैरव नाथ ने मंदिर क्षेत्र की सुरक्षा का दायित्व संभाला था.
इसी मान्यता के चलते मंदिर के मुख्य द्वार पर हनुमान जी और बाबा भैरव की प्रतिमाएं स्थापित हैं. प्राचीन काल से ही राजा-महाराजाओं और साधकों के बीच मां बगलामुखी की पूजा का विशेष महत्व रहा है. आज भी लोग अपने जीवन की परेशानियों, कार्यों में सफलता और सुख-समृद्धि की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं.
मां बगलामुखी मंदिर की पूजा पद्धति में हवन का विशेष महत्व है. यहां होने वाले हवन की एक खास परंपरा लाल मिर्च अर्पित करना है. धार्मिक मान्यता के अनुसार लाल मिर्च को शत्रुओं पर विजय और विरोधी बाधाओं को दूर करने का प्रतीक माना जाता है. इसी विश्वास के चलते मां बगलामुखी की विशेष साधना और हवन में लाल मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है.
मां बगलामुखी को स्तंभन शक्ति की देवी भी माना जाता है. धार्मिक विश्वास के अनुसार, उनकी साधना से विरोधियों के नकारात्मक प्रभाव को रोकने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है. हालांकि, लाल मिर्च अर्पित करने से शत्रुओं का नाश होने या समस्याएं दूर होने की बात धार्मिक मान्यता का हिस्सा है, इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए.
मंदिर में मां बगलामुखी की आरती और पूजा नियमित रूप से होती है. मंगलवार का दिन उनकी आराधना के लिए विशेष माना जाता है. नवरात्र के दौरान भी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. भक्त मां के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और सफलता की प्रार्थना करते हैं.