US Israel Iran War

पाकिस्तानी कनेक्शन और कश्मीर पर नापाक नीयत... अलगाववादी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को हुई उम्रकैद

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंद्र सिंह जीत ने सजा सुनाते हुए कहा कि देश के खिलाफ साजिश जैसे मामलों में कड़ा रुख जरूरी है.

Anuj

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को कश्मीरी अलगाववादी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम) के तहत आसिया अंद्राबी को दोषी माना था.

इस मामले में उनकी सहयोगी सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 साल की सजा से दंडित किया गया है. अदालत का यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सख्त रुख को दर्शाता है.

'कड़ा रुख जरूरी है'

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंद्र सिंह जीत ने सजा सुनाते हुए कहा कि देश के खिलाफ साजिश जैसे मामलों में कड़ा रुख जरूरी है. अदालत ने तीनों को UAPA की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया था.

NIA की दलील और सख्त संदेश

जांच एजेंसी National Investigation Agency (NIA) ने अदालत से आसिया अंद्राबी के लिए उम्रकैद की मांग करते हुए कहा कि उन्होंने भारत के खिलाफ युद्ध जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया. एजेंसी ने तर्क दिया कि ऐसे मामलों में सख्त सजा देकर स्पष्ट संदेश देना जरूरी है, ताकि देश विरोधी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके.

पाकिस्तान से कथित संपर्क

रिपोर्ट के मुताबिक, आसिया अंद्राबी ने पूछताछ में बताया कि उनकी बातचीत पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके सलाहकार सरताज अजीज से होती रही. उन्होंने पाकिस्तान हाई कमीशन के अधिकारियों के साथ भी बैठके की, जहां कश्मीर मुद्दे पर चर्चा हुई. रिपोर्ट के अनुसार, अंद्राबी ने एनआईए को बताया कि उन्होंने 2014 में नवाज शरी को पत्र लिखकर कहा था कि पाकिस्तान कश्मीर के लिए कुछ नहीं कर रहा है. उन्होंने बताया कि शरीफ ने जवाब दिया कि हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं.

आंतकवादी हाफीद सईद से संपर्क

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आसिया अंद्राबी का संपर्क हाफीद सईद जैसे आतंकवादियों से था. जांच एजेंसी के अनुसार, उन्होंने इन लोगों से पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाने और कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की बात कही थी. हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन भी नियमित रूप से अंद्राबी को फोन करता था और वह उससे पाकिस्तान सरकार को संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे को उठाने के लिए राजी करने को कहती थी.