NEET प्रदर्शन में पुलिस की ज्यादती से महिला उत्पीड़न तक, अब होगी हर आरोप की जांच; सुप्रीम कोर्ट ने बनाई समिति

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और हिंसा की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाई है. समिति महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े आरोप भी देखेगी.

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Kuldeep Sharma

NEET पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जांच का दायरा तय कर दिया है. अदालत ने पुलिस की कथित ज्यादती, प्रदर्शनकारियों की हिंसा, महिला प्रदर्शनकारियों से दुर्व्यवहार और बल प्रयोग की वैधता जैसे गंभीर सवालों की पड़ताल के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की है.

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में समिति

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया है. इसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी एलआर बिश्नोई शामिल हैं. अदालत के अनुसार समिति में अनुभव और विशेषज्ञता के साथ विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व रखा गया है. इसका उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान सामने आए घटनाक्रम की व्यापक समीक्षा करना और अदालत को ऐसे सुझाव देना है, जिनके आधार पर आगे जरूरी निर्देश दिए जा सकें.

पुलिस बल प्रयोग और हिंसा की होगी पड़ताल

समिति यह देखेगी कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने जिस तरह कार्रवाई की, वह कानून और तय मानकों के अनुरूप थी या नहीं. लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल सहित बल प्रयोग की परिस्थितियों की जांच होगी. प्रदर्शनकारियों के गंभीर रूप से घायल होने के आरोपों पर भी ध्यान दिया जाएगा. समिति यह पता लगाएगी कि कार्रवाई का आदेश किस स्तर से आया, जिम्मेदारी किसकी थी और क्या बल प्रयोग जरूरत के मुताबिक तथा अनुपातिक था. साथ ही सार्वजनिक सभाओं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में पुलिस की प्रतिक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी.


महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े आरोप भी जांच के दायरे में

सुप्रीम कोर्ट ने महिला प्रदर्शनकारियों से कथित छेड़छाड़, उत्पीड़न और लक्षित हिंसा के आरोपों को विशेष महत्व दिया है. समिति इन घटनाओं की अलग से गंभीरता के साथ जांच करेगी. इसके अलावा पुलिसकर्मियों द्वारा गिरफ्तारी या बल प्रयोग के समय निर्धारित वर्दी और स्पष्ट नाम-पट्टिका लगाए जाने की स्थिति भी देखी जाएगी. प्रदर्शनकारियों की निगरानी और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के तरीकों की भी समीक्षा होगी. समिति यह जांच सकती है कि ऐसी निगरानी संविधान में मिले निजता के अधिकार और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता के अनुरूप थी या नहीं.

जांच लगातार चलेगी, मुआवजे पर भी विचार

अदालत ने साफ किया है कि समिति की जांच केवल एक बार की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी. वह समय-समय पर स्थिति का आकलन करेगी और अंतरिम रिपोर्ट अदालत के सामने रखेगी. जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट इन रिपोर्टों के आधार पर आगे के निर्देश जारी कर सकता है. समिति से पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों पक्षों में घायल लोगों के लिए अंतरिम मुआवजे की संभावना पर विचार करने को भी कहा गया है. इसके साथ ही पैलेट या धातु के प्रक्षेप्य इस्तेमाल पर रोक लगाने की जरूरत समेत पुलिस की कार्रवाई से जुड़े व्यापक सुरक्षा मानकों की भी समीक्षा की जाएगी.