Neem Karoli Baba: कैंची धाम के अलावा देश में कहां-कहां हैं नीब करौरी बाबा के मंदिर? जानें

नीब करौरी बाबा का सबसे प्रसिद्ध आश्रम कैंची धाम है, लेकिन उनसे जुड़े कई अन्य आध्यात्मिक स्थल भी देश में मौजूद हैं. वृंदावन आश्रम, दिल्ली का आश्रम और उत्तराखंड का काकड़ीघाट उनके प्रमुख स्थानों में शामिल हैं.

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Km Jaya

नीब करौरी बाबा का नाम लेते ही सबसे पहले उत्तराखंड स्थित कैंची धाम का ख्याल आता है. बाबा के भक्तों के लिए कैंची धाम आज देश के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है. हाल के समय में महाराजजी के जीवन, उनकी शिक्षाओं और उनके आध्यात्मिक प्रभाव को लेकर लोगों की रुचि तेजी से बढ़ी है. इसका असर कैंची धाम में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर भी दिखाई दे रहा है.

कैंची धाम में सामान्य दिनों में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. बताया जाता है कि आम दिनों में यहां करीब 4,000 से 5,000 लोग दर्शन के लिए आते हैं. कुछ खास दिनों में यह आंकड़ा 6,000 से ऊपर पहुंच जाता है, जबकि वीकेंड पर 15,000 से 20,000 या इससे अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात कही जाती है. बड़ी संख्या में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आने से हल्द्वानी से कैंची धाम तक के रास्ते पर ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ जाता है.

भीमताल

भीमताल, भवाली और गरम पानी के आसपास भी कई बार वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं. नैनीताल और अल्मोड़ा की ओर जाने वाले रास्तों पर भी इसका असर पड़ता है. कई बार सामान्य तौर पर कुछ घंटों में पूरा होने वाला सफर काफी लंबा हो जाता है.


कैंची धाम में बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन को यातायात व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भीमताल और भवाली के पार्किंग क्षेत्रों से शटल सेवा बढ़ाने की व्यवस्था भी की गई. 

वृंदावन 

कैंची धाम की लोकप्रियता के बीच यह जानना भी जरूरी है कि नीब करौरी बाबा से जुड़े आध्यात्मिक स्थल सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित नहीं हैं. वृंदावन का आश्रम भी महाराजजी से जुड़े प्रमुख स्थानों में माना जाता है.

हर साल सितंबर में यहां महासमाधि भंडारे का आयोजन किया जाता है. बताया जाता है कि वर्ष 1973 में चैत्र नवरात्र के दौरान महाराजजी ने यहां नौ दिवसीय यज्ञ भी कराया था. उनकी स्मृति से जुड़े एक मंदिर की वास्तुकला भी खास है, जिसमें अलग-अलग धार्मिक स्थापत्य शैलियों का प्रभाव देखने को मिलता है.

दिल्ली

राजधानी दिल्ली में भी नीब करौरी बाबा से जुड़ा एक आश्रम मौजूद है. बताया जाता है कि महाराजजी ने वर्ष 1973 की गर्मियों में इसकी शुरुआत की थी. यह स्थान मेहरौली के पास मंडी रोड से जोनापुर की दिशा में स्थित है.

आश्रम में सुबह और शाम आरती की व्यवस्था होती है. शांत वातावरण और हरियाली के बीच स्थित यह जगह श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक माहौल का अनुभव कराती है. यहां रुकने के लिए श्रद्धालुओं को पहले से अनुमति लेनी होती है और पहचान पत्र की आवश्यकता भी होती है.

काकड़ीघाट

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले का काकड़ीघाट भी नीब करौरी बाबा से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों में गिना जाता है. यह क्षेत्र अल्मोड़ा और रानीखेत के बीच कोसी नदी के किनारे स्थित है. प्राकृतिक शांति और आध्यात्मिक वातावरण के कारण यह स्थान लंबे समय से संतों और साधकों से जुड़ा रहा है.

काकड़ीघाट का संबंध नीब करौरी बाबा के अलावा सोमबारी बाबा और पंजाबी बाबा से भी बताया जाता है. इस स्थान का संबंध स्वामी विवेकानंद से भी जोड़ा जाता है. उल्लेख मिलता है कि वर्ष 1890 में स्वामी विवेकानंद ने यहां पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान किया था.