92 लाख भरा टैक्स, चली गई नौकरी...Uber इंजीनियर ने खाई भारत छोड़ने की कसम

Uber के एक कथित वरिष्ठ इंजीनियर ने 92 लाख रुपये इनकम टैक्स देने, पैटरनिटी लीव के दौरान नौकरी जाने और सेवरेंस टैक्स को लेकर नाराजगी जताई है.

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Sagar Bhardwaj

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर खुद को Uber का वरिष्ठ इंजीनियर बताने वाले एक व्यक्ति की पोस्ट चर्चा में है. उसने दावा किया कि पिछले वित्त वर्ष में उसने भारत सरकार को करीब 92 लाख रुपये आयकर के रूप में दिए. हालांकि, यह दावा उसी व्यक्ति का है और इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.

‘सैलरी क्लिफ’ के बाद भारी टैक्स का दावा

पोस्ट में व्यक्ति ने बताया कि पिछले साल उसकी आय एक ऐसे स्तर पर पहुंची, जिसे उसने “सैलरी क्लिफ” कहा. इसके बाद उसने दावा किया कि एक ही वित्त वर्ष में उसका आयकर भुगतान 92 लाख रुपये तक पहुंच गया. उसने इस रकम को बेहद ज्यादा बताते हुए टैक्स व्यवस्था पर अपनी नाराजगी जाहिर की.

पैटरनिटी लीव के दौरान चली गई नौकरी

इंजीनियर के मुताबिक, इस साल उसे उस समय नौकरी से हटा दिया गया, जब वह चार महीने के पैटरनिटी लीव पर था. उसने Uber की 18 सप्ताह की आधिकारिक पैटरनिटी लीव पॉलिसी का भी जिक्र किया. हालांकि, उसकी नौकरी समाप्त किए जाने की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि केवल इस Reddit पोस्ट से नहीं की जा सकती.


नवजात बच्चे की जिम्मेदारी ने बढ़ाई मुश्किल

व्यक्ति ने कहा कि उसके घर में नवजात बच्चा है और परिवार की तरफ से मदद उपलब्ध नहीं है. ऐसे में नौकरी जाने के बाद तुरंत नई नौकरी तलाशने के लिए पर्याप्त समय और मानसिक स्थिति जुटाना उसके लिए मुश्किल है. इसी वजह से उसने आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंता जताई.

सेवरेंस पर टैक्स को लेकर नाराजगी

इंजीनियर ने कहा कि उसे तत्काल अपने सेवरेंस भुगतान की जरूरत है, क्योंकि वह फिलहाल पूरी तरह नई नौकरी खोजने पर ध्यान नहीं दे सकता. इसी दौरान उसने सेवरेंस पर लगने वाले संभावित टैक्स को लेकर भी नाराजगी व्यक्त की और आरोप लगाया कि सरकार उससे दोबारा भारी रकम वसूल करेगी.

हालांकि, भारत में सेवरेंस की टैक्स देनदारी हर मामले में एक जैसी नहीं होती. इसका कर उपचार भुगतान की प्रकृति, रोजगार की शर्तों और लागू आयकर प्रावधानों पर निर्भर करता है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर सेवरेंस भुगतान पर एक समान तरीके से टैक्स लगता है.

नौकरी की सुरक्षा पर उठाया सवाल

इंजीनियर ने भारत में कर्मचारियों को मिलने वाली सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए. उसने विदेशों में नौकरी जाने की स्थिति से अपनी तुलना की और माना कि वहां उसके परिवार के लिए परिस्थितियां बेहतर हो सकती थीं. यह उसका व्यक्तिगत आकलन है, न कि किसी व्यापक कानूनी निष्कर्ष का प्रमाण.

टेक सेक्टर की अनिश्चितता का दर्द

यह मामला भारत के टेक सेक्टर में काम करने वाले कई कर्मचारियों की उस चिंता को सामने लाता है, जिसमें अच्छी सैलरी वाली नौकरी भी अचानक खत्म हो सकती है. नौकरी जाने के बावजूद घर का खर्च, बच्चों की जिम्मेदारी और अन्य आर्थिक दायित्व जारी रहते हैं. हालांकि, इस एक Reddit पोस्ट से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी हाई-पेड इंजीनियर ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं.

भारत छोड़ने का लिया फैसला

पोस्ट के अंत में इंजीनियर ने कहा कि वह जल्द भारत छोड़ने की योजना बना रहा है और दोबारा वापस नहीं आना चाहता. उसने दूसरे लोगों को भी अपने अनुभव से सीखने और परिवार के बेहतर भविष्य के लिए विदेश जाने पर विचार करने की सलाह दी.

फिलहाल यह पूरा मामला एक व्यक्ति के दावे और उसके व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित है. 92 लाख रुपये का टैक्स, नौकरी जाने का समय और भारत छोड़ने का फैसला- इन तीनों ने मिलकर इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना दिया है.