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वोटिंग के कई दिनों बाद क्यों बढ़ जाता है मतदान का प्रतिशत? अब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछे सवाल

Lok Sabha Elections: ADR की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह बताए कि आखिर चुनाव के कई दिनों के बाद वोटिंग का प्रतिशत कैसे बढ़ जाता है.

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इस लोकसभा चुनाव में एक चीज देखने को मिली है कि चुनाव आयोग वोटिंग प्रतिशत कई दिन बाद जारी करता है. वोटिंग के दिन आए आंकड़ों की तुलना में बाद में जारी किए गए आंकड़ों को देखें तो मतदान का प्रतिशत बढ़ जाता है. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. असोसिएशन फॉर डेमोक्रैटिक रिफॉर्म्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) के इस मामले में जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह समझाए कि आखिर बाद में जारी होने वाले आंकड़ों में मतदान का प्रतिशत बढ़ कैसे जाता है.

एडीआर ने अपनी याचिका में संदेह जताते हुए कहा था कि ईवीएम मशीनें बदले जाने की आशंका है क्योंकि कई दिन बाद जो आंकड़े सामने आ रहे हैं उनके वोटिंग का प्रतिशत काफी बढ़ जा रहा है. इस मामले में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने सुनवाई की. अब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कहा है कि वह 24 मई तक अपना जवाब दायर करे.

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

एडीआर ने अपनी याचिका में मांग की है कि चुनाव आयोग को निर्देश दिए जाएं कि वह वोटिंग के 48 घंटे के अंदर वोटिंग डेटा को प्रकाशित करे. सुप्रीम कोर्ट ने इसी को लेकर सवाल पूछा कि इसमें देरी क्यों होती है? इस पर चुनाव आयोग की ओर से जवाब दिया गया, 'बहुत सारा डेटा इकट्ठा करने में समय लगता है इसलिए डेटा जारी करने में देरी हुई.' इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 26 अप्रैल को एडीआर की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की गई थी.

अपनी याचिका में एडीआर ने कहा है कि 19 अप्रैल को हुई वोटिंग के अंतिम आंकड़े 30 अप्रैल को जारी किए गए. 11 दिनों के इस अंतर में वोटिंग प्रतिशत में 5 से 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई. वहीं, 26 अप्रैल को हुई वोटिंग के अंतिम आंकड़े भी 30 अप्रैल को ही जारी किए थे. इसी को लेकर राजनीतिक दलों ने भी चिंता जताई थी. कांग्रेस, टीएमसी और सीपीएम जैसी पार्टियों ने इसको लेकर चुनाव आयोग को एक चिट्ठी लिखी थी.