सरदार पटेल जयंती: अंग्रेजों की ICS से IAS- IPS तक, कैसे बदली देश की तस्वीर?

सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत का लौह पुरुष कहा जाता है, लेकिन देश की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनका योगदान भी बेहद अहम है.

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Reepu Kumari

आज स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है. देश की आजादी के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करने की थी. बंटवारे का दर्द, रियासतों का विलय और कानून-व्यवस्था की चुनौतियां नए देश के सामने थीं. ऐसे समय में सरदार वल्लभभाई पटेल ने महसूस किया कि केवल अच्छे कानून और नीतियां बनाने से देश मजबूत नहीं होगा. उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए ईमानदार और सक्षम अधिकारियों की भी जरूरत होगी.

राष्ट्रीय एकता दिवस पर पटेल के इसी योगदान को याद किया जाता है. उन्हें भारत का लौह पुरुष कहने के साथ 'स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया' भी कहा जाता है. इसकी वजह प्रशासनिक सेवाओं को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है.

अंग्रेजों की ICS व्यवस्था क्यों बदलनी पड़ी?

ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय सिविल सेवा यानी ICS प्रशासन की सबसे प्रभावशाली सेवाओं में शामिल थी. इसके अधिकारी जिलों और प्रांतों में राजस्व वसूली, कानून-व्यवस्था और सरकारी कामकाज संभालते थे. लेकिन इस व्यवस्था का उद्देश्य भारतीय जनता की सेवा करना नहीं, बल्कि ब्रिटिश शासन को मजबूत बनाए रखना था. उच्च पदों पर अंग्रेज अधिकारियों का दबदबा था और भारतीयों के लिए इसमें प्रवेश पाना मुश्किल था.


पुरानी व्यवस्था खत्म करने के पक्ष में नहीं थे पटेल

आजादी के बाद कुछ नेता अंग्रेजों की बनाई प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करना चाहते थे. हालांकि, पटेल इससे सहमत नहीं थे. उनका मानना था कि अनुभवी अधिकारियों के बिना देश का प्रशासन कमजोर पड़ सकता है. वे चाहते थे कि व्यवस्था की निष्ठा बदले और अधिकारी ब्रिटिश सरकार के बजाय भारत के संविधान के प्रति जवाबदेह हों. साथ ही, राजनीतिक दबाव से दूर रहकर निष्पक्ष काम करें.

ICS से IAS तक कैसे पहुंचा भारत?

आजादी के बाद ICS को भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS के रूप में विकसित किया गया. यह केवल नाम बदलने का फैसला नहीं था. अब अधिकारियों की जिम्मेदारी स्वतंत्र भारत का प्रशासन चलाना और सरकार की नीतियों को लागू करना था. IAS को अखिल भारतीय सेवा बनाया गया, जिसके अधिकारी राज्यों के साथ केंद्र सरकार में भी जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं. इससे केंद्र और राज्यों के बीच प्रशासनिक संपर्क मजबूत हुआ.

विभाजन के बाद IPS की जरूरत क्यों पड़ी?

देश के विभाजन के दौरान हुई हिंसा और विस्थापन ने कानून-व्यवस्था की चुनौती बढ़ा दी थी. ऐसे में प्रशिक्षित पुलिस अधिकारियों की जरूरत महसूस हुई. भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS को अखिल भारतीय सेवाओं का हिस्सा बनाया गया. इसका उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा, पुलिस प्रशासन को मजबूत करना और कानून का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित करना था.

भर्ती से संविधान तक, कैसे मजबूत हुआ ढांचा?

प्रशासनिक सेवाओं में योग्यता आधारित चयन के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था विकसित हुई और भर्ती प्रक्रिया संघ लोक सेवा आयोग से जुड़ी. प्रशिक्षण में प्रशासन, कानून, वित्त और सामाजिक विविधता को महत्व दिया गया. संविधान के अनुच्छेद 312 में अखिल भारतीय सेवाओं के गठन का प्रावधान भी किया गया.

पटेल की सोच में मजबूत प्रशासन का मतलब जनता से दूरी बनाना नहीं था. उनका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना था, जो संकट में भी काम करे और संविधान के अनुसार जनता की सेवा करे. आज भी IAS और IPS की भूमिका इसी जिम्मेदारी से जुड़ी हुई है.