नई दिल्ली: महाराष्ट्र में शिवसेना की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता संजय राउत के विवादित बयान और छह सांसदों के कथित तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने की खबरों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दोनों गुट अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं. इस पूरे मामले ने उद्धव ठाकरे खेमे की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं.
सोमवार को संजय राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि शिंदे ने छह सांसदों को जन्म दिया है और यह पूरी प्रक्रिया उनके सरकारी आवास नंदनवन में हुई. राउत की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई. विपक्षी नेताओं ने भी बयान को लेकर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया.
शिवसेना (UBT) के जिन छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की बात कही जा रही है, उनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल हैं. इन अटकलों को तब और बल मिला जब ये सांसद हाल ही में दिल्ली में हुई पार्टी की संसदीय बैठक में शामिल नहीं हुए.
यह पहली बार नहीं है जब राउत के बयान विवाद का कारण बने हों. कुछ दिन पहले भी उन्होंने पार्टी छोड़ने की तैयारी कर रहे नेताओं के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था. बाद में उन्होंने अपने रुख का बचाव करते हुए कहा कि जो लोग पार्टी और विचारधारा से विश्वासघात करते हैं, उनके प्रति कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
शिंदे खेमे के नेताओं ने सांसदों के फैसले का स्वागत किया है. महाराष्ट्र सरकार में मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि सांसद एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व से प्रभावित हैं. उनके मुताबिक सांसदों ने अपने फैसले की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष को भी दे दी है और वे बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं.
इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना की पहचान और विरासत को कमजोर नहीं किया जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता और राजनीतिक लाभ के लिए पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने जनता के भरोसे को ठेस पहुंचाई है.