दलित वोटर्स को साधने की तैयारी! संघ परिवार 'धर्म सम्मेलनों' की कर रहा प्लानिंग
Sangh Over Dalits Voters: लोकसभा चुनाव में भाजपा को झटका लगने के बाद विहिप धर्म सम्मेलनों के जरिए दलितों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश करने की तैयारी में है. विश्व हिन्दू परिषद यानी VHP की ओर से आयोजित कार्यक्रम में दलितों के घरों में भोजन करना और दलित बस्तियों में धार्मिक उपदेश देना शामिल होगा. कहा जा रहा है कि आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों को देखते हुए ये फैसला लिया गया है.
Sangh Over Dalits Voters: लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा के दलित वोट बैंक के एक वर्ग ने विपक्षी INDIA गठबंधन को सपोर्ट कर दिया था. इसे देखते हुए संघ परिवार गांवों और शहरी क्षेत्रों में अनुसूचित जाति (एससी) बस्तियों को लक्ष्य करके 15 दिवसीय धर्म सम्मेलन आयोजित करने की योजना बना रहा है. विश्व हिन्दू परिषद (VHP) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में दलितों के घरों में भोजन करना और दलित बस्तियों में धार्मिक उपदेश देना शामिल होगा.
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि ये कार्यक्रम दिवाली (1 नवंबर को निर्धारित) से 15 दिन पहले शुरू होगा. हमने धार्मिक नेताओं और संतों से अनुरोध किया है कि वे शहरों और कस्बों में दलित गांवों और बस्तियों में पदयात्रा करें. इस दौरान संत समुदाय के साथ भोजन करेंगे और धार्मिक प्रवचन भी देंगे. आलोक कुमार ने कहा कि ये समाज में धार्मिक जागृति के लिए किया जा रहा है. हम समय-समय पर ऐसा करते रहते हैं. विचार ये है कि सत्संग (धार्मिक बैठक) में लोगों के आने का इंतजार करने के बजाय, सत्संग लोगों के पास जाएगा.
जन्माष्टमी पर 60 बरस की होगी विश्व हिंदू परिषद
आलोक कुमार के मुताबिक, इससे पहले संगठन कृष्ण जन्माष्टमी पर अपने 60वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में समारोह आयोजित करने में भी व्यस्त रहेगा. 24 अगस्त से शुरू होकर, विहिप देश भर के लगभग 9,000 ब्लॉकों में इस संबंध में धार्मिक सम्मेलन आयोजित करेगा. उन्होंने कहा कि इनमें महिलाओं और दलितों समेत समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी होगी.
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हालांकि, संघ परिवार का ये आयोजन समाज में अस्पृश्यता को समाप्त करने और हिंदुओं को एकजुट करने के रूप में है, लेकिन दलितों के एक बड़े वर्ग की ओर से लोकसभा चुनावों में पाला बदलने की कथित कोशिश के मद्देनजर इसका राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है.
महाराष्ट्र, कर्नाटक और कुछ हिंदी राज्यों में खिसके दलित वोटर्स
महाराष्ट्र और कर्नाटक के अलावा कुछ हिंदी पट्टी के राज्यों में भी दलित वोटर्स के खिसकाव ने भाजपा की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया और पार्टी को पूर्ण बहुमत (272 सीटें) से 32 सीटों से चूकना पड़ा. भाजपा को सबसे बड़ा झटका यूपी में लगा, जहां जनवरी में अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन करने के बावजूद, पार्टी न केवल अयोध्या (फैजाबाद) सीट समाजवादी पार्टी (सपा) से हार गई, बल्कि 2019 के लोकसभा चुनावों में राज्य में अपनी 62 सीटों से इस बार सिर्फ 33 सीटों पर सिमट गई.
चुनावों में दलितों के रुझान में बदलाव की शुरुआत कुछ भाजपा उम्मीदवारों के बयानों से हुई, जिन्होंने अपने चुनावी भाषणों में संकेत दिया कि अगर पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए 400 सीटों से आगे निकल गई, तो हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए संविधान में बदलाव किया जाएगा. इसे इंडिया एलायंस ने तुरंत हथियार बना लिया, जिसने दलित आइकन बीआर अंबेडकर की ओर से तैयार किए गए संविधान को बचाने के मुद्दे पर अभियान चलाया.