रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे को लेकर अहम संकेत मिले हैं. सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में उनके शामिल होने की संभावना जताई गई है. रूस के उप विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निमंत्रण गंभीरता से लिया जा रहा है. साथ ही रूस ने भारत के साथ तेल आपूर्ति के मौजूदा समझौतों को जारी रखने का भरोसा भी दिया है.
रूस के उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेंको ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद राष्ट्रपति पुतिन के भारत आने में फिलहाल कोई बड़ी बाधा नहीं दिख रही है. हालांकि पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर रखी जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि रूस भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के भीतर सहमति बनाने के प्रयासों का समर्थन करेगा.
रुडेंको ने माना कि ब्रिक्स समूह में अलग-अलग देशों की नीतियां और प्राथमिकताएं होने के कारण सहमति बनाना आसान नहीं है. इस संगठन में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी शामिल हैं, जिनके बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं. इसके बावजूद सदस्य देश वैश्विक स्तर पर अपने हितों की बेहतर सुरक्षा के लिए साथ काम करना चाहते हैं.
रूस ने स्पष्ट किया है कि वह भारत सहित अपने साझेदार देशों के साथ किए गए तेल आपूर्ति के सभी पुराने अनुबंधों का पालन करेगा. हालांकि देश ने 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया है. इसके पीछे कीमतों में उतार-चढ़ाव को वजह बताया गया है, लेकिन तेल सप्लाई प्रभावित नहीं होगी.
मार्च 2026 में भारत ने रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की, जो नौ महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई. विशेषज्ञ मानते हैं कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत-रूस सहयोग और मजबूत हो सकता है. रूस ने भी उम्मीद जताई है कि क्षेत्रीय संघर्ष जल्द खत्म होगा, जिससे सभी देशों को राहत मिलेगी.