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रुपौली हार से नहीं लिया सबक तो विधानसभा चुनाव में हो जाएंगे साफ! RJD के सामने EBCs को मनाने की चुनौती

बता दें कि रुपौली अति पिछड़ा वर्ग बहुल क्षेत्र है और आरजेडी उम्मीदवार बीमा भारती भी इसी वर्ग से ताल्लुक रखती हैं, बावजूद इसके रुपौली की जनता ने उन्हें नकार दिया. आरजेडी इस हार को पचा नहीं पा रही है. अगले साल बिहार में विधानसभा के चुनाव हैं, ऐसे में आरजेडी के सामने अति पिछड़ा वर्ग को जल्द से जल्द मनाने की चुनौती खड़ी हो गई है.

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India Daily Live

Rupauli Bypoll: पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र की रुपौली विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मिली करारी हार को आरजेडी पचा नहीं पा रही है. तमाम प्रचार प्रसार के बाद भी पार्टी की उम्मीदवार बीमा भारती की करारी हार इस बात का सबूत है कि लालू प्रसाद यादव की पार्टी राज्य के अति पिछड़ा वर्ग (EBCs) को लुभाने में लगातार नाकामयाब हो रही है.

बीमा भारती की हुई करारी हार

हाल ही में हुए रुपौली उपचुनाव में आरजेडी उम्मीदवार बीमा भारती तीसरे स्थान पर रही थीं. इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार शंकर सिंह ने जेडीयू के कलाधर प्रसाद मंडल और आरेडी की बीमा भारती को भारी अंतर से हराया था.

 EBCs बहुल है रुपौली

ऐसा तब हुआ जब शंकर सिंह ऊंची जाति के राजपूत नेता हैं जबकि मंडल और भारती दोनों गंगोटा समुदाय से आते हैं जो कि राज्य का अति पिछड़ा समुदाय  (EBCs ) है. रुपौली  EBCs बहुल क्षेत्र है. यहां 25 % लोग अति पिछड़ा समुदाय के हैं जबकि राजपूत मतदाता केवल 7% है. बता दें कि आरजेडी ने लोकसभा चुनाव में दो EBCs उम्मीदवार उतारे थे और दोनों की ही करारी हार हुई.

पप्पू यादव का नहीं मिला सहयोग

हाल ही में बिहार में हुए जाति सर्वेक्षण के मुताबिक बिहार में अति पिछड़ा वर्ग सबसे अधिक 36% हैं. रुपौली उपचुनाव में मिली करारी हार को लेकर राजेडी के एक नेता ने कहा कि कांग्रेस नेता पप्पू यादव का आरजेडी उम्मीदवार बीमा भारती को उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिला. अगर वह सहयोग करते तो बात कुछ और होती.

बता दें कि बीमा भारती लोकसभा चुनाव से पहले रुपौली से जेडीयू की विधायक थीं. लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने जेडीयू से इस्तीफा दे दिया था और आरजेडी के टिकट पर पूर्णिया लोकसभा सीट पर पप्पू यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा था. पप्पू यादव ने उन्हें करारी शिकस्त दी थी. लोकसभा चुनाव में हार के बाद बीमा ने फिर से रुपौली का विधायक बनने की कोशिश की लेकिन इस बार रुपौली की जनता ने उन्हें नकार दिया. 

आरजेडी को हर हाल में मनाने होंगे EBCs

बिहार में अगले साल अक्टूबर में विधानसभा के चुनाव होने हैं. ऐसे में चुनाव से पहले राज्य के सबसे बड़ी आबादी अति पिछड़ा वर्ग को मनाने की तेजस्वी के सामने बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि नीतीश कुमार पहले ही इस समुदाय को ध्यान में रखते हुए आरक्षण को बढ़ा चुके हैं और चुनाव से पहले वह इस तरह के और भी फैसले ले सकते हैं.