menu-icon
India Daily

'एक साल से इंतजार पर बदले में मिला सिर्फ अहंकार', मणिपुर पर ये क्या बोल गए मोहन भागवत

Mohan Bhagwat on Manipur: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने मणिपुर को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने राज्य में हुई हिंसा के बाद काम की प्राथमिकता के बारे में बताया है. भागवत ने कहा कि राज्य एक साल से शांति की राह देख रहा है.

India Daily Live
'एक साल से इंतजार पर बदले में मिला सिर्फ अहंकार', मणिपुर पर ये क्या बोल गए मोहन भागवत
Courtesy: RSS

Mohan Bhagwat on Manipur: आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पदभार ग्रहण करने के बाद अपने मंत्रियों को विभागों को बंटवारा कर दिया. दोपहर से इन्हीं पर खबरें थीं. हालांकि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के एक वीडियो ने चर्चा का रुख बदल दिया. उन्होंने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मणिपुर के मामले में बात की है. साथ ही भागवत ने मामले को प्राथमिकता से हल करने की सलाह दी है. अब एक बार फिर चुनावों के बाद देश में मणिपुर को लेकर चर्चा होने लगी है.

बता दें भागवत नागपुर में सोमवार को आयोजित कार्यकर्ता विकास वर्ग में शामिल हुए थे. इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने मणिपुर की बात की है. इसके साथ ही उन्होंने चुनाव, प्रचार और पक्ष विपक्ष पर भी कहा है.

RSS ने वीडियो किया पोस्ट

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आधिकारिक X हैंडल से वीडियो पोस्ट किया गया है. इसमें मोहन भागवत किसी कार्यक्रम में बोलते नजर आ रहे हैं. इसी में उन्होने मणिपुर के मामले पर प्राथमिकता से काम करने की बात कही है. इसके बाद से देश में फिर मणिपुर के मामले में चर्चा होने लगी है.

मणिपुर पर क्या बोले

मोहन भागवत ने कहा कि पूर्वोत्तर का राज्य मणिपुर एक साल से हिंसा में झुलस रहा है. मणिपुर की आंखें एक साल से शांति की राह टोह रही हैं. इसे प्राथमिकता से हल करने की जरूरत है. इसपर पहले विचार करना चाहिए. अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि काम करे पर इसका अहंकार ना पाले, वह सही सेवक है.

चुनाव पर बोले भागवत

चुनाव एक सहमति बनाने की प्रक्रिया है. संसद में कोई सवाल के दोनों पहलू सामने आएं. इसी के कारण ऐसी व्यवस्था की गई है. चुनाव संपन्न हुए, उसके परिणाम भी आए. सरकार भी बन गई. सबकुछ हो गया लेकिन उसकी चर्चा अभी चल ही रही है. हमें ये जानना होगा कि जो हुआ क्यों हुआ, कैसे हुआ और आखिर में हुआ क्या-क्या है? चुनाव लोकतंत्र होने वाली प्रमुख और जरूरी घटना है. हालांकि, इस बीच हम अपना कर्तव्य करते रहते हैं.