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मंत्री के खिलाफ धरने पर बैठा था किडनैपर रोहित आर्य! 2 करोड़ की बकाया रकम और ‘माझी शाळा’ विवाद की क्या है पूरी कहानी?

मुंबई में बच्चों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्य का विवाद अब सरकारी गलियारों तक पहुंच गया है. उसका आरोप है कि महाराष्ट्र सरकार ने उसका प्रोजेक्ट आइडिया चुराया और ₹2 करोड़ की भुगतान राशि रोक दी.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
मंत्री के खिलाफ धरने पर बैठा था किडनैपर रोहित आर्य! 2 करोड़ की बकाया रकम और ‘माझी शाळा’ विवाद की क्या है पूरी कहानी?
Courtesy: Social media

मुंबई: मुंबई में हुए चौंकाने वाले बंधक कांड के पीछे की कहानी अब सामने आ रही है. आरोपी रोहित आर्य, जिसने 17 बच्चों समेत 19 लोगों को बंधक बनाया था, दरअसल शिक्षा विभाग और सरकार से बेहद नाराज था.

उसका दावा था कि महाराष्ट्र सरकार ने उसके द्वारा तैयार किए गए 'माझी शाळा, सुंदर शाळा' प्रोजेक्ट का कॉन्सेप्ट और फिल्म के राइट्स इस्तेमाल किए, लेकिन न तो क्रेडिट दिया गया और न ही 2 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. अब यह पूरा मामला जांच के दायरे में है.

‘माझी शाळा, सुंदर शाळा’ प्रोजेक्ट

रोहित आर्य का दावा था कि महाराष्ट्र सरकार की 'माझी शाळा, सुंदर शाळा' योजना उसकी बनाई फिल्म लेट्स चेंज के कॉन्सेप्ट पर आधारित थी. उसने यह विचार शिक्षा विभाग को 2022 में प्रस्तुत किया था, जिसे तत्कालीन शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने सराहा और लागू भी किया. लेकिन प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के बाद, रोहित को न तो कोई आर्थिक भुगतान मिला और न ही उसकी पहचान को मान्यता. यही कारण उसकी नाराजगी की जड़ माना जा रहा है.

'सरकार ने आइडिया चुराया, न पैसा दिया न नाम'

रोहित का आरोप था कि उसके कॉन्सेप्ट का उपयोग कर सरकार ने ₹2 करोड़ का बजट जारी किया, लेकिन पूरा प्रोजेक्ट उसके बिना आगे बढ़ा दिया गया. उसने कई बार शिक्षा विभाग और मंत्रियों से संपर्क किया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला. इसके विरोध में उसने कई बार धरने और अनशन किए. एक मौके पर तो उसने लगभग एक महीने तक अनशन किया था, जिसके बाद भी उसे सिर्फ आश्वासन ही मिला.

'अगर मैंने आत्महत्या की, तो जिम्मेदार होंगे ये लोग'

अपने पुराने वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट में रोहित ने शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर, उनके निजी सचिव मंगेश शिंदे और अन्य अधिकारियों के नाम लेते हुए कहा था कि अगर उसने आत्महत्या की, तो इन लोगों को जिम्मेदार ठहराया जाए. उसने कहा था कि 'सरकार ने मेरी मेहनत और सोच को छीन लिया, और मुझे अपमानित किया.' उसका यह बयान अब वायरल हो रहा है और जांच एजेंसियां इसे केस से जोड़कर देख रही हैं.

सरकार और विभाग की सफाई

इस विवाद पर महाराष्ट्र के शिक्षा सचिव रंजीत सिंह देओल ने कहा कि रोहित को किसी भी तरह का ₹2 करोड़ देने का कोई समझौता नहीं हुआ था. उन्होंने बताया कि रोहित ने 'स्कूल स्वच्छता मॉनिटरिंग' प्रोजेक्ट में स्वेच्छा से काम किया था और इसके लिए उसे प्रमाणपत्र भी दिया गया था. वहीं, पूर्व मंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि 'रोहित को विभाग की ओर से कुछ भुगतान किए गए थे, लेकिन उसने बिना अनुबंध के प्रोजेक्ट आगे बढ़ाया. किसी को बंधक बनाना गलत है, यह एक अपराध है.'

ऑडिशन के बहाने बच्चों का अपहरण और मौत

घटना के दिन रोहित आर्य ने मुंबई के पवई स्थित RA स्टूडियो में बच्चों को ऑडिशन के नाम पर बुलाया और 17 बच्चों समेत 19 लोगों को बंधक बना लिया. सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सभी बच्चों को सकुशल बचा लिया. इस दौरान रोहित ने एयरगन से पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई. रोहित गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

रोहित आर्य की मौत के साथ ही महाराष्ट्र सरकार और शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अब यह जांच का विषय है कि क्या सच में उसका आइडिया चुराया गया था, या यह सिर्फ एक मानसिक दबाव में उठाया गया चरम कदम था.