इस दुनिया में हर कोई सफलता की सीढ़ी चढ़ना चाहता है, लेकिन उस सीढ़ी पर चढ़ने के लिए जिस जुनून की जरूरत होती है वह कुछ ही लोगों के पास होता है और जिनके पास वो जुनून होता है वही इतिहास लिखते हैं. जुआना की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने 47 साल की उम्र में NEET की परीक्षा पास कर चर्चा बटोरी है.
जुआना के तीनों बच्चे MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं पति भी डॉक्टर हैं और अब जुआना खुद डॉक्टर बनकर अपने दिवंगत पिता का सपना पूरा करने जा रही हैं.
जुआना कहती हैं, 'बच्चों और पति को देखकर मैं सोचती थी कि क्यों ना मैं भी डॉक्टर बन जाऊं. इसलिए मैंने NEET परीक्षा देने का फैसला किया, जब रिजल्ट आया तो मैंने परीक्षा पास कर ली थी. अब मैं सीट मिलने का इंतजार कर रही हूं और डेंटल सर्जन बनने के सपने को साकार करना चाहती हूं.' जुआना अब्दुल्ला कासरगोड के कोट्टाचेरी की रहने वाली हैं.
उनके दादा पीवी कुन्हामद हाजी कान्हानगढ़ के शुरुआती कपड़ा व्यापारियों में से एक थे. वह पूर्व लॉयंस जिले कवर्नर के अब्दुल रसिख और असियुम्मा की दूसरी बेटी हैं. उनके पिता हमेशा चाहते थे कि उनके दोनों बच्चे डॉक्टर बनें, हालांकि उनकी बड़ी बहन शैबाना ने जूलॉजी को अपने करियर के तौर पर चुना.
वहीं जुआना ने अपनी स्कूलिंग पूरी करने के बाद मेडिकल का एंट्रेंस एग्जाम दिया लेकिन वह पास नहीं हुईं. इसके बाद उन्होंने जूलॉजी में डिग्री ली और बाद में मेडिकल फॉर्माकोलॉजी में पोस्टग्रेजुएट की पढ़ाई शुरू कर दी, लेकिन पिता की मौत के बाद उन्होंने बीच में की पढ़ाई छोड़ दी और बाद में कन्यनगाड के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. के पी अब्दुल्ला से निकाह कर लिया.
जुआना ने कहा कि जब वह पेपर देने पेरिया पॉलीटेक्निक परीक्षा केंद्र पहुंची तो गेटकीपर ने उन्हें यह कहते हुए रोक लिया कि यह परीक्षार्थियों के घुसने का गेट है. जुआना ने कहा कि मैंने अल्लाह को याद करते हुए पेपर दिया. उन्होंने कहा कि मैंने सोचा भी नहीं था कि मैं यह परीक्षा पास कर लूंगी, लेकिन रिजल्ट बिल्कुल उलट था और अब मेरे सामने खुला आसमान है.
जुआना की बड़ी बेटी मरियम आफरीन अब्दुल्ला तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज से अपनी हाउस सर्जरी कर रही हैं. उनके बेटे सालेह अब्दुर रसिख और सलमान अब्दुल अब्दुल खादर MBBS के द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्र हैं, जबकि उनकी छोटी बेटी आसीमा आस्य कोझिकोड के रेस पब्लिक स्कूल में 12वीं की छात्र हैं.
जुआना बताती हैं कि साल 2020 में सरकार द्वारा NEET की परीक्षा देने के लिए अपर एज लिमिट खत्म करने के बाद उन्हें यह परीक्षा देने का अवसर मिला.
वह कहती हैं कि उनके पति और उनके बच्चों ने उनका पूरा सपोर्ट किया और उन्होंने यूट्यूब और अपने बच्चों के नोट्स से तैयारी शुरू की. जुआना कहती हैं कि यह सब पैसा कमाने के लिए नहीं है बल्कि यह साबित करने के लिए है कि अर इंसान चाह ले तो कुछ भी हासिल कर सकता है.