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India Daily

Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर दिखेगा ईगल का प्रहार, भारतीय सेना पहली बार दुनिया को दिखाएगी अपनी AI ड्रोन आर्मी की ताकत!

भारतीय सेना 26 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ पर अपनी अत्याधुनिक ड्रोन प्रणाली ईगल ऑन आर्म और मिलेनियम ऑफ आर्मी मिशन की पहली झलक पेश करने जा रही है.

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर दिखेगा ईगल का प्रहार, भारतीय सेना पहली बार दुनिया को दिखाएगी अपनी AI ड्रोन आर्मी की ताकत!
Courtesy: AI

नई दिल्ली: इस साल गणतंत्र दिवस की परेड केवल झांकियों और मार्चिंग दस्तों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दुनिया भारत के उस मूक योद्धा को देखेगी जो दुश्मन को पाताल से भी खोज निकालने में सक्षम है. भारतीय सेना 26 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ पर अपनी अत्याधुनिक ड्रोन प्रणाली ईगल ऑन आर्म और मिलेनियम ऑफ आर्मी मिशन की पहली झलक पेश करने जा रही है.

AI से लैस मूक योद्धा

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने अपनी युद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए सेना ने AI से लैस ऐसे ड्रोन तैयार किए हैं जिनकी नजर बाज से भी तेज है. इन ड्रोन्स का नाम ईगल इसलिए रखा गया है क्योंकि ये कई किलोमीटर दूर बैठी छोटी सी हरकत को भी पहचान कर उसे नष्ट करने की क्षमता रखते हैं. इस मिशन को हकीकत बनाने के लिए भारतीय सेना के इंजीनियरिंग कोर के 40 एमटेक अधिकारियों और 500 से अधिक विशेषज्ञों ने दिन-रात एक किया है.

क्यों खास है ईगल ऑन आर्म मिशन?

यह सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि भारतीय तकनीक का गौरव है. इन ड्रोन्स की सबसे बड़ी खासियत इनकी सटीकता Precision है. ये ड्रोन खुद फैसले लेने और दुश्मन के रडार को चकमा देने में माहिर हैं. ये बिना शोर किए दुश्मन की सीमा में घुसकर तबाही मचा सकते हैं, इसलिए इन्हें सेना का मूक योद्धा कहा जा रहा है. मेक इन इंडिया के तहत विकसित यह तकनीक दिखाती है कि भारतीय सेना अब केवल आयातित हथियारों पर निर्भर नहीं है.

गणतंत्र दिवस पर भविष्य का दीदार

26 जनवरी को जब ये ड्रोन कर्तव्य पथ के ऊपर से गुजरेंगे, तो यह संदेश साफ होगा कि भारत की रक्षा दीवार अब अभेद्य है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन ड्रोन्स के शामिल होने से सीमा पर निगरानी और आतंकवाद विरोधी अभियानों में भारतीय सेना की शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी. परेड के दौरान ईगल ऑन आर्म का प्रदर्शन केवल सैन्य शक्ति का दिखावा नहीं है, बल्कि यह उन शहीद जवानों को श्रद्धांजलि भी है जिन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में अपनी जान गंवाई. अब हमारे पास ऐसे ईगल हैं जो हमारे जवानों के पहुंचने से पहले ही खतरे को साफ कर देंगे.