तिरुपति बालाजी में चढ़े सोने का आखिर क्या होता है? जानें कैसे रखा जाता है एक-एक पैसे का हिसाब
तिरुपति बालाजी मंदिर में आने वाले नकद, सोना और आभूषणों की गिनती पराकमणि भवन में कड़ी सुरक्षा के बीच की जाती है. चलिए जानते हैं कैसे किया जाता है प्रबंधन.
नई दिल्ली: देश के सबसे समृद्ध मंदिरों में शामिल तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर में हर साल श्रद्धालु करोड़ों रुपये नकद, सोना, चांदी और बहुमूल्य आभूषण दान करते हैं. इतने बड़े स्तर पर आने वाले चढ़ावे का प्रबंधन बेहद व्यवस्थित और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाता है. मंदिर का संचालन तिरुमला तिरुपति देवस्थानम करता है.
मंदिर की दान पेटियों को हर दिन कड़ी सुरक्षा के बीच सील कर एक विशेष भवन, पराकमणि भवन, में ले जाया जाता है. यहां सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच नकदी, सिक्के, विदेशी मुद्रा, सोने, चांदी और अन्य आभूषणों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है. इसके बाद उनकी गिनती और मूल्यांकन किया जाता है.
चढ़ावे की गिनती करने वालों के लिए नियम?
चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के लिए भी सख्त नियम होते हैं. उन्हें विशेष ड्रेस कोड का पालन करना पड़ता है और भवन में प्रवेश से पहले तथा बाहर निकलने के बाद कई चरणों की सुरक्षा जांच से गुजरना होता है.
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नकदी और विदेशी मुद्रा की गिनती पूरी होने के बाद उसे मंदिर के कोषागार में जमा किया जाता है. बाद में इस राशि का एक हिस्सा विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा किया जाता है, जबकि शेष राशि मंदिर के संचालन, धार्मिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जनकल्याणकारी कार्यों में खर्च की जाती है.
कैसे किया जाता है प्रबंधन?
मंदिर में दान के रूप में मिलने वाले सोने और सोने के आभूषणों का भी अलग तरीके से प्रबंधन किया जाता है. जरूरत के अनुसार आभूषणों को पिघलाकर शुद्ध सोने के बिस्कुट बनाए जाते हैं. इसके बाद बड़ी मात्रा में इस सोने को राष्ट्रीयकृत बैंकों की गोल्ड डिपॉजिट स्कीम में जमा कराया जाता है. इससे मंदिर को हर वर्ष ब्याज के रूप में बड़ी आय प्राप्त होती है, जिसका उपयोग धार्मिक और सामाजिक कार्यों में किया जाता है.
वर्षों से टीटीडी ने हजारों किलोग्राम सोना विभिन्न बैंकों में गोल्ड डिपॉजिट योजनाओं के तहत जमा कराया है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2010 में लगभग 1,000 किलोग्राम और वर्ष 2014 में लगभग 1,800 किलोग्राम सोना एक राष्ट्रीयकृत बैंक की गोल्ड डिपॉजिट योजना में जमा किया गया था. योजना की अवधि पूरी होने पर मंदिर चाहे तो अपना सोना या उसके बराबर मूल्य और ब्याज प्राप्त कर सकता है.
इस तरह तिरुपति बालाजी मंदिर में आने वाले हर रुपये, हर आभूषण और हर ग्राम सोने का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाता है. सुरक्षा, पारदर्शिता और वित्तीय प्रबंधन की सख्त व्यवस्था के कारण मंदिर में मिलने वाले दान का उपयोग धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ विभिन्न जनहित कार्यों के लिए भी किया जाता है.