राज्यसभा में नई सियासी हलचल, AAP के सांसदों ने बढ़ाई BJP की ताकत; NDA को मिली बड़ी मजबूती

आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से एनडीए की संख्या 145 पहुंच गई है. बीजेपी अब साधारण बहुमत से सिर्फ एक कदम दूर है, जबकि दो-तिहाई बहुमत के लिए अभी 18 सांसदों की जरूरत है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी यानी AAP के सात राज्यसभा सांसदों के BJP में शामिल होने के बाद, शुक्रवार को राज्यसभा में NDA को एक बड़ी बढ़त मिली. हालांकि सत्ताधारी गठबंधन अभी भी दो-तिहाई बहुमत से काफी पीछे है. AAP सांसदों के पाला बदलने से NDA की कुल ताकत अब 145 हो गई है. 

राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 244 है, जिसमें दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए 163 सांसदों की जरूरत होती है. इसका मतलब है कि NDA को अभी भी 18 सांसदों की कमी है. एक बार जब NDA ऊपरी सदन में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लेगा, तो उसे संवैधानिक संशोधनों की जरूरत वाले अहम कानून पास करने में कोई दिक्कत नहीं होगी. 

अभी कितने सांसदों की है जरूरत?

लोकसभा में साधारण बहुमत होने के बावजूद NDA के पास अभी दो-तिहाई बहुमत नहीं है. लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए उसे 363 सांसदों के समर्थन की जरूरत है. यही वजह थी कि हाल ही में संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा अहम बिल पास नहीं हो पाया था.

इस बीच आम आदमी पार्टी के सभी सात सदस्यों जिनमें राघव चड्ढा भी शामिल हैं, जो BJP में शामिल होते ही, BJP ने विलय के लिए एक अर्जी दी. एक बार जब राज्यसभा के सभापति C.P. राधाकृष्णन आम आदमी पार्टी के BJP में विलय को मंजूरी दे देंगे, तो सत्ताधारी पार्टी के सांसदों की कुल संख्या बढ़कर 113 हो जाएगी. फिलहाल संसद में BJP के 106 सांसद हैं.

BJP को और कितने सदस्यों की होगी जरूरत?

राज्यसभा में साधारण बहुमत के लिए 123 सदस्यों की जरूरत होती है. सात सांसदों के आने के बाद BJP की अपनी ताकत 113 तक पहुंच जाएगी. अगर सात नॉमिनेटेड सदस्यों और दो निर्दलीय सांसदों का समर्थन भी इसमें जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा 122 तक पहुंच जाता है. यह आंकड़ा ठीक आधे के बराबर है यानी बहुमत के निशान पर. अब BJP अपने दम पर साधारण बहुमत हासिल करने से बस एक कदम दूर होगी.

राघव चड्ढा ने क्या कहा?

राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार दो-तिहाई से ज्यादा सांसदों ने विलय करने का फैसला किया है. अगर चेयरमैन इस विलय को मंजूरी दे देते हैं, तो इन सांसदों की सदस्यता पर कोई खतरा नहीं होगा. AAP के 10 में से 7 सांसदों का एक साथ आना तकनीकी रूप से विलय की श्रेणी में आता है. अब NDA को उम्मीद है कि, इस मजबूत स्थिति के सहारे भविष्य में अहम बिल पास करना आसान हो जाएगा.