गुजरात का राजकोट हादसा. कोई कह रहा है प्रशासन की लापरवाही है, किसी को गेमिंग जोन के मालिक की. 28 लोग जिंदा जलकर खाक हो गए. कुछ का पूरा शरीर मिला तो कई लोग टुकड़ों में मिले. अगर एसपी क्राइम की मानें तो यहां 32 लोग मरे हैं, जिनमें 12 बच्चे भी हैं. यह हादसा इतना भयानक था कि 8 टीमों घंटों तक आग बुझाती रहीं लेकिन जब तक आग बुझी, कई लोग जलकर मर गए.
यह कैसा गेमिंग जोन था, जिसमें बाहर भागने के लिए सिर्फ एक निकासी गेट था. नगर निगम ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि यह अवैध था. फायर डिपार्टमेंट का कहना है कि हमने इस गेमिंग जोने के लिए एनओसी ही नहीं दी थी. अगर नहीं दी थी तो यह गेमिंग जोन चल क्यों रहा था, इसका जवाब किसी के पास नहीं है.
जिन लोगों ने इस हादसे को होते हुए देखा है, उनकी रूह कांप गई है. गुजरात में गेमिंग जोन पर ताबड़तोड़ एक्शन हो रहे हैं. 100 से ज्यादा गेमिंग जोन बंद कराए गए हैं लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है. कई लोगों ने दावा किया है कि गेमिंग जोन का टिकट 500 से घटकर 99 रुपये पर जैसे ही आया, टिकट के लिए मारामारी मच गई. गेमिंग जोन में क्षमता से ज्यादा भीड़ बढ़ने लगी.
गुनाह एक, गुनहगार गिन नहीं पाएंगे
पुलिस ने टीआरपी गेमिंग जोन के मालिक युवराज सिंह सोलंकी, प्रकाश जैन, राहुल राठौर और एक मैनेजर से पूछताछ कर रही है. इस हमले में सबकी भूमिका संदिग्ध है. कौन कितना गुनहगार है, किसी को कोई नहीं पता है.
VIDEO | CCTV footage of fire that broke out at game zone in Rajkot yesterday, leading to the death of 27 people.#Rajkotfire pic.twitter.com/bvmi1YQ36I
— Press Trust of India (@PTI_News) May 26, 2024
पता था, हादसा होगा, फिर भी क्यों साधी थी चुप्पी?
साल 2020 में बने इस गेमिंग जोन में कई खामियां सामने आ रही हैं. लोगों का दावा है कि स्ट्रक्चर और टीन शेड पर खड़ा ये गेमिंग जोन, मरम्मत से गुजर रहा था, तभी एक चिंगारी उठी और सब राख हो गया. पूरा गेमिंग जोन, कुछ अलग किस्म के कपड़े, रबर और फाइबर से बना था. पूरा ढांचा लकड़ी, टीन और थर्माकोल से तैयार किया गया था, जो आग लगने के लिए ज्यादा संवेदनशील होता है. गेज जोन में इतना डीजल रखा गया था कि देखते ही देखते आग सुलगी और सब जलकर राख हो गया.
आग लगी और मरने के लिए तैयार होना पड़ा!
जैसे ही आग लगी जो जहां था, वहीं फंसा रह गया. सीढ़ियों पर आग ही आग थी, बचने के लिए कोई एग्जिट गेट ही नहीं था. राजकोट के डीएम आनंद पटेल का कहना है कि शवों को पहचाना नहीं जा सकता है, इनका डीएनए टेस्ट होगा. पुलिस कमिश्नर राजू भार्गव ने भी यह कहकर पत्ता झाड़ लिया है कि गेमिंग जोन के पास फायर एनओसी तक नहीं थी.
ऐसे राख हुए कि कोई पहचान नहीं पाएगा
प्रशासनिक लापरवाही से क्षुब्ध गुजरात हाई कोर्ट ने गुजरात के प्रमुख शहरों से गेमिंग जोन की डीटेल्स मांगी है. हाई कोर्ट ने कहा है कि ये हादसा, मानव निर्मित है. नागरिक इलाके में बिना इजाजल के ही गेमिंग जोन बन गया लेकिन लाशें सवाल पूछ रही हैं कि क्या उनकी नियति में ऐसे और इस तरह ही जलना लिखा था? वे घूमने आए थे और जलकर राख हो गए. ऐसे राख हुए हैं जिन्हें कोई पहचान नहीं पा रहा है.