Rajasthan Paper Leak Case: राजस्थान के आईपीएस अधिकारी ने पेपर लीक मामले में पूर्व सीएम अशोक गहलोत की गिरफ्तारी की मांग की है. 2009 बैच के IPS अधिकारी पंकज कुमार चौधरी पहले भी अशोक गहलोत पर आरोप लगा चुके हैं. दो हफ़्ते पहले चौधरी ने गहलोत को एक ओपन लेटर लिखा था, जिसमें मुख्यमंत्री के रूप में उनके पिछले दो कार्यकालों के दौरान उन पर प्रतिशोध और रहस्यमय द्वेष का आरोप लगाया गया था.
आईपीएस अधिकारी पंकज कुमार चौधरी वर्तमान में राजस्थान में सामुदायिक पुलिस सुपरिटेंडेंट के पद पर तैनात हैं. उन्होंने कहा है कि पेपर लीक की सच्चाई सामने लाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को गिरफ्तार किया जाना चाहिए. 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि खुले पत्र में कुछ बातें छूट गई थीं.
राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) की ओर से 2021 के पेपर लीक मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के पूर्व सदस्य रामूराम रायका, रायका के बेटे और बेटी समेत अन्य को गिरफ्तार करने के बाद सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के मामले में चौधरी ने एक्स पर कहा कि परीक्षा रद्द होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गहलोत को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और 2020-2023 के बीच तैनात अतिरिक्त महानिदेशक, एसओजी की जांच होनी चाहिए.
पिछले साल सितंबर में भी चौधरी ने कहा था कि आरपीएससी के प्रभारी के रूप में उन्हें 'इसे साफ करने' के लिए केवल तीन महीने की जरूरत है. इस संबंध में उन्होंने गहलोत को एक पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि उन्हें आयोग का प्रभार दिया जाना चाहिए.
वाराणसी के रहने वाले पंकज कुमार चौधरी ने पहले भी गहलोत के खिलाफ आरोप लगाए हैं. 2013 में, उन्होंने कहा था कि जैसलमेर में एसपी के पद पर उनका ट्रांसफर कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने एक प्रभावशाली मुस्लिम नेता गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट खोली थी और उसके बेटे सालेह मोहम्मद, जो उस समय कांग्रेस के विधायक थे, के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जबकि गहलोत सीएम थे. चौधरी का कथित तौर पर एफआईआर दर्ज होने के 48 घंटे के भीतर तबादला कर दिया गया था.
चौधरी ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जब उन्हें निशाना बनाया गया, पहले गहलोत की ओर से और फिर वसुंधरा राजे की ओर से, जब वे मुख्यमंत्री बनीं. उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ने मिलकर उन्हें सेवा से हटाने का प्रयास किया. 2015 में, उन्होंने वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि उन्हें उनके पद से हटाकर निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने सितंबर 2014 में बूंदी के नैनवा और खानपुर में हुए दंगों के दौरान वीएचपी और बजरंग दल के दंगाइयों को सरकार के सभी स्तरों से दबाव के बावजूद रिहा करने से इनकार कर दिया था.
चौधरी ने आरोप लगाया था कि मुसलमानों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करने के लिए कहा गया था. चौधरी ने ये आरोप तब लगाया जब उन्हें राजस्थान सरकार की ओर से चार्जशीट दी गई जिसमें उन पर दंगों से निपटने के लिए समय पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया था.
2019 की शुरुआत में, उन्हें कथित एक्सट्रा मेरिटल अफेयर के कारण सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. हालांकि, सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल, दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अनुकूल आदेशों के बाद मई 2021 में गृह मंत्रालय की ओर से उन्हें बहाल कर दिया गया था. अपने खुले पत्र में चौधरी ने कहा कि जब गहलोत मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने उनसे पांच मिनट का समय मांगा था, लेकिन उनके आसपास के लोगों ने ऐसा नहीं होने दिया, जिससे खुला पत्र लिखना ‘जरूरी’ हो गया.