राहुल गांधी ने दी महंगाई की चेतावनी, गिनाए आम आदमी की जेब पर होने वाले 4 सीधे प्रहार
राहुल गांधी ने रुपये के कमजोर होने और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर चेतावनी दी है कि देश मुद्रास्फीति की नई लहर की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आंकड़े नहीं, हर घर की जेब पर सीधा असर डालने वाले संकेत हैं.
नई दिल्ली: विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को चेतावनी दी कि भारत मुद्रास्फीति की एक नई लहर की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग के बीच रुपये के कमजोर होने और ईंधन की कीमतों में तेज उछाल को इसकी वजह बताया. गांधी ने कहा कि ये संकेत साफ हैं और सरकार इसे सामान्य भले ही कहे, लेकिन असलियत कुछ और है.
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि डॉलर के मुकाबले रुपया 100 के करीब पहुंच रहा है और औद्योगिक ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है. यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब रुपया 64 पैसे लुढ़ककर 93.53 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था.
हर घर की जेब पर पड़ेगा सीधा असर
गांधी ने बताया कि रुपये की गिरावट और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि उत्पादन और परिवहन महंगा हो जाएगा, एमएसएमई पर सबसे बुरा असर पड़ेगा, रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ेंगे और विदेशी निवेश तेजी से बाहर निकलेगा. इससे शेयर बाजार पर भी दबाव बढ़ेगा.
चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की मार
कांग्रेस नेता ने आगे चेताया कि चुनाव के बाद पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी होगी. उनका इशारा पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की ओर था. गांधी ने कहा कि यह सिर्फ समय की बात है और सरकार के पास इससे निपटने की कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है.
केरल में एलपीजी संकट, थरूर ने रखा पक्ष
पश्चिम एशिया में जंग के चलते ऊर्जा की कीमतों में उछाल आया है. केरल में एलपीजी संकट गहरा गया है, जहां कई होटल-रेस्तरां बंद हो गए. शशि थरूर ने कहा कि रुपये की गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण हैं.
मिडिल ईस्ट युद्ध की आग में झुलस रहा 'एलपीजी'
गौरतलब है कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की वजह से भारत समेत कई देशों में तेल व गैस आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है, जिससे स्थिति गंभीर होती जा रही है. सरकार की तरफ से लगातार हालात सामान्य होने के दावे किए जा रहे हैं और लोगों से अपील की जा रही है कि वो पैनिक बाइंग से बचें. हालांकि हकीकत ये भी है कि सरकार के दावों से इतर लोगों को गैस सिलेंडर के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं.