भारत दौरे पर आए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऊर्जा व्यापार, अमेरिकी प्रतिबंधों और ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति पर खुलकर बात की. उन्होंने साफ कहा कि रूस से तेल और यूरेनियम खरीदना भारत का अधिकार है, ठीक वैसे ही जैसे अमेरिका वर्षों से रूसी परमाणु ईंधन आयात करता आया है.
पुतिन के बयान उस समय आए जब ट्रंप सरकार ने भारत पर रूसी तेल की खरीद को लेकर अतिरिक्त 25% शुल्क लगाकर कुल टैरिफ 50% कर दिया है. उनके बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया है.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि यदि अमेरिका रूस से परमाणु ईंधन खरीद सकता है, तो भारत को भी रूस से तेल या अन्य ऊर्जा संसाधन खरीदने का पूरा अधिकार है. उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिका आज भी रूसी यूरेनियम अपने परमाणु संयंत्रों के लिए आयात करता है. उनके अनुसार, ऊर्जा व्यापार किसी भी देश का स्वतंत्र निर्णय होना चाहिए और इसे राजनीतिक दबाव से नियंत्रित नहीं किया जाना चाहिए.
भारत पर ट्रंप द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के सवाल पर पुतिन ने कहा कि ट्रंप अपनी नीतियां अपने आर्थिक सलाहकारों के आधार पर बनाते हैं. उन्होंने कहा कि ट्रंप 'good faith' में निर्णय लेते हैं, और उनकी टीम मानती है कि ऐसे शुल्क से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लाभ होता है. पुतिन ने इसे अमेरिका की आर्थिक नीति का हिस्सा बताया, जिस पर टिप्पणी करना उनका उद्देश्य नहीं है.
पुतिन ने स्पष्ट कहा कि रूस न तो ऐसे टैरिफ लगाता है और न भविष्य में ऐसी नीति अपनाने की योजना है. उन्होंने कहा कि रूस की अर्थव्यवस्था खुली है और मुक्त व्यापार में विश्वास करती है. उनका कहना था कि विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का सम्मान किया जाना चाहिए और समय के साथ सभी देशों को इन मानकों की ओर लौटना चाहिए.
पिछले कुछ वर्षों में भारत रूस से कच्चे तेल और ऊर्जा संसाधनों का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है. पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी पारस्परिक लाभ और भरोसे पर आधारित है. उनके अनुसार, भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह संबंध और मजबूत होगा. उन्होंने इस साझेदारी को वैश्विक भू-राजनीति से अलग रखने की अपील की.
पुतिन ने यह भी कहा कि भारत और रूस दशकों से रणनीतिक साझेदार हैं, और ऊर्जा व्यापार इस साझेदारी की रीढ़ है. उन्होंने ट्रंप के दबाव या पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को भारत-रूस संबंधों पर असर न डालने वाली बातें बताया. इंटरव्यू के अंत में उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी भारत अपने स्वतंत्र हितों को प्राथमिकता देता रहेगा.