मिडिल ईस्ट संकट के साइड इफेक्ट, प्रीमियम पेट्रोल हुआ महंगा; जानें नई दरें

मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2 से 2.3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. हालांकि साधारण पेट्रोल के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: वैश्विक तेल बाजार में मची उथल-पुथल का असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने लगा है. 20 मार्च 2026 से तेल विपणन कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में इजाफा कर दिया है. सीएनबीसी-आवाज की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने घरेलू कंपनियों को यह कड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया है. फिलहाल यह वृद्धि केवल ब्रांडेड ईंधन तक सीमित है, जिससे हाई-परफॉर्मेंस गाड़ियां चलाने वाले प्रभावित होंगे.

तेल कंपनियों ने एचपीसीएल के 'पावर' और आईओसीएल के 'एक्सपी95' जैसे प्रीमियम फ्यूल की कीमतों में 2.3 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि की है. डीलरों के मुताबिक, ये दरें प्रभावी हो गई हैं. प्रीमियम पेट्रोल का उपयोग आमतौर पर इंजन की बेहतर क्षमता और अधिक माइलेज के लिए किया जाता है. राहत की बात यह है कि आम जनता द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले रेगुलर पेट्रोल की कीमतों में अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है जिससे फिलहाल बड़ी आबादी को राहत मिली है.

वैश्विक बाजार और मध्य पूर्व में तनाव 

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण खाड़ी देशों में बढ़ता तनाव है. ईरान द्वारा तेल और गैस ठिकानों पर किए गए हमलों के कारण उत्पादन बाधित हुआ, जिससे ब्रेंट क्रूड इस हफ्ते करीब 5 प्रतिशत बढ़ गया. हालांकि, शुक्रवार को कीमतों में मामूली गिरावट आई क्योंकि जापान और यूरोपीय देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा का भरोसा दिया है. इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें अब भी 100 डॉलर के ऊपर बनी हुई हैं.

अमेरिका के रणनीतिक प्रयास 

बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका सक्रिय हो गया है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं ताकि वहां का तेल बाजार में आ सके. इसके अलावा, अमेरिका अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व से अतिरिक्त कच्चा तेल छोड़ने पर भी विचार कर रहा है. इन कदमों का उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति को सुचारू बनाना और कीमतों को नियंत्रित करना है ताकि बाजार में स्थिरता लौट सके और आम उपभोक्ताओं को राहत मिले.

भारतीय अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल 

एलारा कैपिटल ने एक हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यदि कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 'ब्रेकिंग पॉइंट' साबित हो सकता है. ब्रोकरेज के अनुसार, इस स्तर के ऊपर जाने पर सरकार के लिए टैक्स और सब्सिडी के जरिए कीमतों को संभालना नामुमकिन हो जाएगा. इससे न केवल सरकारी खजाने पर भारी बोझ बढ़ेगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं के खर्च और कॉर्पोरेट मुनाफे पर भी सीधा बुरा असर पड़ेगा.

क्या आम पेट्रोल भी होगा महंगा? 

विशेषज्ञों का मानना है कि 110 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार होते ही साधारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी टाली नहीं जा सकेगी. वर्तमान में ब्रेंट फ्यूचर्स 108.26 डॉलर और अमेरिकी क्रूड 95.27 डॉलर पर है. यदि मध्य पूर्व में हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में आम जनता को भी महंगाई का तगड़ा झटका लग सकता है. फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां वैश्विक परिस्थितियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं ताकि घरेलू बाजार को बड़े झटकों से बचाया जा सके.