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21 दिन की आजादी में क्या-क्या हासिल कर गए अरविंद केजरीवाल, चुनाव में फायदा हुआ या नुकसान?

Arvind Kejriwal News: दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने रविवार को शाम 5 बजे तिहाड़ में सरेंडर किया. इससे पहले उन्होंने AAP के दफ्तर में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. वो कुल 21 दिन जेल से बाहर रहे. आइये जानें इस दौरान उनके साथ क्या-क्या हुआ?

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21 दिन की आजादी में क्या-क्या हासिल कर गए अरविंद केजरीवाल, चुनाव में फायदा हुआ या नुकसान?
Courtesy: Social Media

Arvind Kejriwal News: शराब नीति घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल की जमानत अवधि खत्म हो गई. इसके बाद उन्होंने आज तिहाड़ जेल में समर्पण कर दिया. चुनाव के दौरान उन्हें कोर्ट ने 21 दिन के लिए जमानत दी. हालांकि, इसके बाद भी वो इसे बढ़वाने की कोशिश करते रहे लेकिन नाकाम रहे. इन 21 दिनों में केजरीवाल के साथ बहुत कुछ हुआ जिसमें उन्हें कुछ सहानुभूति मिलीं तो काफी उन्होंने फजीहत का भी सामना किया. आइये जानें इस दौर में क्या-क्या हुआ?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को शाम 5 बजे तिहाड़ जेल में सरेंडर किया. इससे पहले वे AAP के दफ्तर गए और कार्यकर्ताओं से मिलकर उनको संबोधित किया. यहां उन्होंने एग्जिट पोल को गलत बताते हुए कहा कि मैं मैं देश बचाने के लिए जेल जा रहा हूं.

कोई खास लाभ नहीं?

अरविंद केजरीवाल का जेल से बाहर ना तो उनके लिए कोई खाल लाभ वाला रहा और ना ही उनकी पार्टी को इससे कुछ खास मिला. और तो और दिल्ली में कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने में इंडिया गठबंधन को लाभ मिला. आइये अब समझें अगर वो जेल से नहीं आए होते या जेल गए ही न होते तो क्या-क्या होता?

मालीवाल केस नहीं होता

अरविंद केजरीवाल घर लौटे तो मालीवाल उनसे मिलने के लिए पहुंची और इसके बाद फिर CM हाउस सुर्खियों में आ गया. घटना तो कहीं भी हो सकती थी लेकिन केजरीवाल अगर जेल में होते तो उनके घर में न होती या वो जेल गए ही न होते तो शायद ऐसी नौबत न आती.

संजय सिंह कुछ और होते

संजय सिंह जब जेल से आए थे तो उनके तेवर कुछ और थे लेकिन मालीवाल केस के बाद वो गायब से हो गए. हालांकि, आज और कल वो इंडिया गठबंधन की बैठक और उनके जेल जाते समय केजरीवाल के साथ थे. मालीवाल केस में संजय और आतिशी में विरोधाभास दिखा. अगर ये केस न हुआ होता तो शायद AAP सहानुभूति के वोट बटोर पाती.

कांग्रेस का साथ मिलता

कांग्रेस नेतृत्व पहले से ही केजरीवाल के समर्थन से बच रहा था. बाद में स्वाति मालीवाल केस के बाद गठबंधन के बावजूद दोनों तरफ से परहेज हुआ.लखनऊ में संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में अरविंद केजरीवाल दूर ही रहे. उसी दिन उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए रोड शो किया लेकिन राहुल गांधी ने उनके लिए एक भी रोड शो नहीं किया.

सहानुभूति कम हुई

अरविंद केजरीवाल के जेल में रहने से पार्टी को मिल रही सहानुभूति मिल रही थी. उनके जेल के बहाने कैंपेन तेज हो रहे थे लेकिन जेल से बाहर आते ही सहानुभूति का स्तर कम हुआ और ये सियासत में बदल गया. इंसुलिन की बात से केजरीवाल ने सहानुभूति लेने की कोशिश की लेकिन एग्जिट पोल बता रहे हैं इसका असर नहीं हुआ.

नई चुनौतियां न आतीं

अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद पार्टी कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी समझ कर काम कर रहे थे. केजरीवाल की पत्नी ने भी पति का मैसेंजर बनकर मोर्चा संभाल ही लिया था. हालांकि, केजरीवाल के आते ही वो गायब सी हो गईं और अब केजरीवाल के केस, जमानत की अर्जियों को लेकर हो रही चर्चा नई मुसीबत बन रही है.