IPL 2026

लॉकडाउन या फिर कुछ और! PM मोदी ने क्यों 24 घंटे में दो बार सोना खरीदने से किया मना? 3 बड़ी वजह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे के भीतर दो बार देशवासियों से सोना खरीदने से बचने की अपील की है. गुजरात की जनसभा में उन्होंने कहा कि सोने का आयात देश की संपत्ति को विदेश भेजता है.

India Daily
Reepu Kumari

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीयों से एक साल तक शादियों के लिए सोना न खरीदने की अपील ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है. हमारे देश में सोना सिर्फ गहना नहीं बल्की एक परंपरा, बचत और पारिवारिक समारोहों से गहराई से जुड़ा हुआ है. गुजरात में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सोने के आयात से देश की संपत्ति विदेशों में चली जाती है. पीएम ने 24 घंटे में दूसरी बार यह अपील की. 

इससे पहले, रविवार को भी प्रधानमंत्री ने मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के संबंध में कई महत्वपूर्ण बातें कही थी. उस अवसर पर भी उन्होंने विदेशी मुद्रा के मुद्दे पर चर्चा की थी और विशेष रूप से नागरिकों से सोना न खरीदने का आग्रह किया था. क्या आप जानते हैं पीएम के इस ऐलान के पीछे की तीन बड़ी वजह क्या है. यहां हम समझने की कोशिश करते हैं. 

पहली वजह-भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव

सरकार के अनुसार युद्ध और वैश्विक तनाव के इस दौर में विदेशी मुद्रा का संतुलित इस्तेमाल बेहद जरूरी है. अगर हमलोग देश में डॉलर की खपत करेंगे तो  तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव भी कम पड़ेगा. यही कारण है कि गैर-जरूरी आयात को सीमित करने पर जोर दिया जा रहा है.

 दूसरी वजह- पुराने जेवरों के इस्तेमाल को मिल रहा बढ़ावा

सरकार जनता को नया सोना खरीदने के बजाय पुराने गहनों को रिसाइकिल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. हमलोगों के इस कदम से ज्वेलरी इंडस्ट्री का कारोबार भी चलता रहेगा. विदेशों से सोना मंगाने की जरूरत भी कम होगी. हो सकता है अगर घरेलू स्तर पर पुराने सोने का इस्तेमाल बढ़ता है, तो आयात पर निर्भरता घटेगी और विदेशी मुद्रा की बचत में मदद मिलेगी.

तीसरी वजह-कच्चे तेल और खाद की बढ़ती कीमतें

मीडिल ईस्ट में तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और खाद की कीमतों पर हुआ  है. हमारा देश अपनी ऊर्जा और कृषि जरूरतों के लिए इन वस्तुओं के आयात पर काफी हद तक निर्भर है. ऐसे में बढ़ती कीमतों का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ रहा है. अब सरकार उन क्षेत्रों में खर्च नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, जहां विदेशी मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव कम किया जा सके.