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शहीद भगत सिंह से तुलना...गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर बनी वेब सीरीज को बैन करने की उठी मांग, कोर्ट पहुंचा मामला

गुजरात की साबरमती जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर बनी वेबसीरीज गैंगस्ट 'लॉरेंस एंड गैंगस्टर' की रिलीज को बैन किए जाने को लेकर कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है. पेशे से वकील प्रशांत चौधरी ने इस मामले में जनहित याचिका दाखिल करते हुए कहा कि उन्होंने यूट्यूब पर वेब सीरीज का ट्रेलर देखा, जिसमें गैंगस्टर की तुलना शहीद भगत सिंह से की गई है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
शहीद भगत सिंह से तुलना...गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर बनी वेब सीरीज को बैन करने की उठी मांग, कोर्ट पहुंचा मामला

गुजरात की साबरमती जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर बनी वेबसीरीज गैंगस्ट 'लॉरेंस एंड गैंगस्टर' की रिलीज को बैन किए जाने को लेकर कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है. पेशे से वकील प्रशांत चौधरी ने इस मामले में जनहित याचिका दाखिल करते हुए कहा कि उन्होंने यूट्यूब पर वेब सीरीज का ट्रेलर देखा, जिसमें गैंगस्टर की तुलना शहीद भगत सिंह से की गई है. उन्होंने कहा, 'इस ट्रेलर को देखने के बाद मेरी भावनाएं आहत हुईं. मेरे जैसे कई देशभक्तों की भावनाएं भी आहत हुई होंगी.' प्रशांत चौधरी ने यह भी कहा कि किसी भी वेब सीरीज को रिलीज़ करने या ट्रेलर अपलोड करने से पहले उचित प्रमाणपत्र और डिस्क्लेमर होना चाहिए.

शहीद भगत सिंह से तुलना पर नाराजगी
याचिका में तर्क दिया गया है कि शहीद भगत सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजादी दिलाने में योगदान दिया. उनकी तुलना किसी अपराधी या गैंगस्टर से करना न केवल गलत है, बल्कि यह राष्ट्रवादियों की भावनाओं का अपमान भी है. प्रशांत चौधरी ने आगे कहा कि इस तरह की वेब सीरीज समाज पर गलत प्रभाव डाल सकती है. उन्होंने कहा, 'जनता के बीच किसी गैंगस्टर को नायक के रूप में प्रस्तुत करना युवा पीढ़ी को भटकाने का काम कर सकता है.' याचिका में यह मांग की गई है कि इस वेब सीरीज को तत्काल प्रभाव से बैन किया जाए या फिर इसे रिलीज़ करने से पहले संवैधानिक रूप से समीक्षा की जाए.

अदालत का फैसला रहेगा अहम
वेब सीरीज 'लॉरेंस एंड गैंगस्टर' को लेकर यह विवाद अब अदालत के पटल पर पहुंच गया है. अदालत का फैसला न केवल इस मामले में दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि मनोरंजन की आड़ में समाज को क्या दिखाया जा सकता है और क्या नहीं.