श्रीनगर: जम्मू और कश्मीर में बिजली की दरों में बढ़ोतरी का फैसला अब सियासी मुद्दा बन गया है. श्रीनगर में सोमवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी PDP और अपनी पार्टी ने अलग अलग प्रदर्शन कर नेशनल कॉन्फ्रेंस की उमर अब्दुल्ला सरकार पर निशाना साधा. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने के बजाय आम लोगों पर बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ डाल दिया है.
जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लिए संयुक्त विद्युत नियामक आयोग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में औसतन 6.83 प्रतिशत बढ़ोतरी को मंजूरी दी है. नई दरें 1 सितंबर से लागू होने वाली हैं. इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के उस चुनावी वादे को मुद्दा बनाया है, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की बात कही गई थी.
PDP ने श्रीनगर स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रदर्शन किया. पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक परेशानियों के बीच बिजली की दरें बढ़ने से आम परिवारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा. पार्टी नेताओं ने सरकार से उपभोक्ताओं को राहत देने और फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की.
PDP नेता वहीद उर रहमान पारा भी पहले बिजली दरों में बढ़ोतरी पर सवाल उठा चुके हैं. उन्होंने इसे आम लोगों की आर्थिक परेशानियों से जोड़ते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के 200 यूनिट मुफ्त बिजली के चुनावी वादे की याद दिलाई.
अपनी पार्टी ने भी श्रीनगर की प्रेस कॉलोनी में प्रदर्शन किया. पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बिजली दरों में बढ़ोतरी का विरोध करते हुए सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की. अपनी पार्टी अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अल्ताफ बुखारी ने भी सरकार से टैरिफ बढ़ोतरी वापस लेने और 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने की मांग की है.
हालांकि, बिजली दरों में 6.83 प्रतिशत की औसत बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर उपभोक्ता का बिल इसी अनुपात में बढ़ेगा. वास्तविक असर उपभोक्ता की श्रेणी और बिजली खपत के आधार पर अलग अलग होगा.
मीटर वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 200 यूनिट तक बिजली की दर 2.45 रुपये प्रति यूनिट, 201 से 400 यूनिट तक 4.20 रुपये और 400 यूनिट से अधिक खपत पर 4.60 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है. फिक्स्ड चार्ज 10 रुपये प्रति किलोवाट प्रति माह किया गया है.
आयोग ने बताया कि सरकार की सब्सिडी को ध्यान में रखते हुए नई दरें तय की गई हैं. सरकार ने टैरिफ से जुड़ी सब्सिडी और सहायता के लिए 2,420.78 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई है. आयोग के अनुसार पूरा राजस्व अंतर उपभोक्ताओं से वसूलने पर करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ती, जिसे टैरिफ शॉक माना जाता.