कोलंबो टेस्ट में ऋषभ पंत की बल्लेबाजी सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं रही, बल्कि संघर्ष और जज्बे की मिसाल भी बनी. पहले दिन कलाई और दूसरे दिन कंधे में चोट लगने के बावजूद पंत ने मैदान नहीं छोड़ा. उन्होंने 89 गेंदों पर 63 रन बनाकर भारत की पारी को मजबूती दी. इस दौरान ध्रुव जुरेल के साथ उनकी अहम साझेदारी भी हुई. पंत की इस पारी ने उन्हें कई बड़े रिकॉर्ड के करीब पहुंचा दिया और महेंद्र सिंह धोनी का खास रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया.
कोलंबो में पंत ने पहली पारी के दौरान 89 गेंदों का सामना किया और 63 रन बनाए. उनकी पारी में 6 चौके और 2 छक्के शामिल रहे. यह उनके टेस्ट करियर का 21वां अर्धशतक है. चोट की परेशानी के बीच खेली गई इस पारी में उनका आक्रामक अंदाज भी देखने को मिला. पंत ने ध्रुव जुरेल के साथ सातवें विकेट के लिए 112 रन जोड़े, जिसमें अकेले पंत का योगदान 60 रन रहा.
पंत की इस पारी ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के एक बड़े रिकॉर्ड तक पहुंचाया. वह विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज बन गए. इसके साथ ही विदेशी मैदानों पर विकेटकीपर के तौर पर सर्वाधिक टेस्ट रन बनाने वाले भारतीय भी बन गए. इस मामले में उन्होंने अपने आदर्श महेंद्र सिंह धोनी को पीछे छोड़ा. धोनी ने विदेशी टेस्ट में 32.84 की औसत से 2496 रन बनाए थे, जबकि पंत के रन 2500 के पार पहुंच चुके हैं.
विदेशी टेस्ट में विकेटकीपर के तौर पर सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अभी ऑस्ट्रेलिया के एडम गिलक्रिस्ट के नाम है. गिलक्रिस्ट ने 49.69 की औसत से 2634 रन बनाए हैं. दक्षिण अफ्रीका के मार्क बाउचर 2517 रन के साथ दूसरे स्थान पर हैं. पंत अब तीसरे पायदान पर हैं और 2500 से ज्यादा रन बना चुके हैं. ऐसे में गिलक्रिस्ट का रिकॉर्ड अब उनकी पहुंच से बहुत दूर नहीं है.
कोलंबो की यह पारी पंत के लिए इसलिए भी यादगार रहेगी क्योंकि उन्होंने लगातार चोट की परेशानी के बीच बल्लेबाजी जारी रखी. कलाई और कंधे की चोट ने उनके खेल को प्रभावित जरूर किया, लेकिन उनका इरादा कमजोर नहीं पड़ा. अर्धशतक और रिकॉर्ड के साथ पंत ने एक बार फिर साबित किया कि वह मुश्किल परिस्थितियों में भी टीम के लिए बड़ा योगदान दे सकते हैं. अब उनकी नजर विदेशी टेस्ट में विश्व रिकॉर्ड पर है.