Pariksha Pe Charcha 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित परीक्षा पे चर्चा प्रोग्राम में इस बार महान मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम, पैरालंपिक स्टार अवनि लेखरा और बैडमिंटन खिलाड़ी सुहास यथिराज ने छात्रों को स्ट्रेस से निपटने और असफलता से सीख लेने के टिप्स दिए. उन्होंने बताया कि नाकामी के बिना सफलता अधूरी है और मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता.
अवनि लेखरा: "नाकामी ही सफलता की सबसे बड़ी सीढ़ी है"... दो बार की पैरालंपिक गोल्ड मैडल विजेता निशानेबाज अवनि लेखरा ने छात्रों को असफलता से घबराने के बजाय उससे सीखने की सलाह दी. उन्होंने कहा, "लोग मानते हैं कि सफलता और असफलता एक-दूसरे के विपरीत हैं, लेकिन मेरा मानना है कि नाकामी ही सफलता का सबसे बड़ा हिस्सा है. बिना असफलता के सफलता संभव नहीं है."
मैरी कॉम: "कोई भी क्षेत्र आसान नहीं होता, मेहनत ही एकमात्र रास्ता है"... छह बार की विश्व चैम्पियन और लंदन ओलंपिक ब्रॉन्ज मैडल विजेता मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम ने अपने करियर में आई चुनौतियों के बारे में बात की. उन्होंने कहा, "शुरुआत में मुझे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. कई बार हतोत्साहित हुई, लेकिन चुनौतियों से लड़कर आगे बढ़ी."
उन्होंने बताया कि महिलाओं को मुक्केबाजी जैसे खेलों में संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन उन्होंने इसे अपनी चुनौती के रूप में स्वीकार किया और खुद को साबित किया. "अगर मैं कर सकती हूं, तो आप भी कर सकते हैं. कोई भी क्षेत्र आसान नहीं होता, मेहनत और संघर्ष के बिना सफलता नहीं मिलती."
सुहास यथिराज: "डर से बाहर निकलो और अपना सर्वश्रेष्ठ दो"... पैरालंपिक सिल्वर मेडल विजेता और आईएएस अधिकारी सुहास यथिराज ने छात्रों को हार के डर से मुक्त होकर आगे बढ़ने की सलाह दी. उन्होंने कहा, "अच्छी चीजें आसानी से नहीं मिलतीं. अगर सूरज की तरह चमकना है, तो जलने के लिए भी तैयार रहना होगा."
उन्होंने एशियाई बैडमिंटन चैम्पियनशिप 2016 का एक्सपीरियंस शेयर किया, जब वह हार के डर से अपने पहले मैच में हार गए थे. लेकिन जब उन्होंने खुद को डर से बाहर निकलने और अपनी पूरी क्षमता के साथ खेलने का संकल्प दिलाया, तो न सिर्फ उन्होंने वह मैच जीता, बल्कि आगे के छह मैच जीतकर चीन में गोल्ड मेडल ॉजीतने वाले पहले गैर-वरीय खिलाड़ी बन गए.
उन्होंने छात्रों को संदेश दिया, "डर को खुद पर हावी मत होने दो. सामने कौन है, इसकी चिंता छोड़कर सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दो."