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जम्मू में सैन्य ठिकानों की जासूसी कर रहे पाकिस्तानी ड्रोन को भारतीय सेना ने किया ढेर, 64GB मेमोरी कार्ड ने खोले बड़े राज!

जम्मू-कश्मीर के खौर सेक्टर में भारतीय सेना ने संदिग्ध पाकिस्तानी निगरानी ड्रोन को मार गिराया. ड्रोन से 64 जीबी मेमोरी कार्ड मिला, जिसमें संवेदनशील सैन्य ठिकानों के फोटो और वीडियो होने की जांच की जा रही है.

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Kuldeep Sharma

जम्मू-कश्मीर के खौर सेक्टर में भारतीय सेना ने एक संदिग्ध निगरानी ड्रोन को निष्क्रिय कर बड़ी सुरक्षा सफलता हासिल की है. सेना के अनुसार ड्रोन महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास उड़ान भर रहा था. बरामद उपकरण और मेमोरी कार्ड की जांच के बाद पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.

सैन्य ठिकानों के पास दिखा ड्रोन, सेना ने तुरंत की कार्रवाई

यह घटना खौर सेक्टर के चकला गांव के पास सामने आई, जहां सेना की निगरानी के दौरान एक ड्रोन महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के आसपास मंडराता दिखाई दिया. सुरक्षा एजेंसियों ने इसे संभावित खतरा मानते हुए तत्काल कार्रवाई की और ड्रोन को मार गिराया. शुरुआती जांच में यह ड्रोन चीन में निर्मित बताया जा रहा है, जिसे कथित तौर पर निगरानी मिशन के लिए संशोधित किया गया था. घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है.

मेमोरी कार्ड से मिले अहम सुराग

ड्रोन के साथ 64 जीबी का माइक्रो एसडी कार्ड भी बरामद हुआ है. प्रारंभिक जांच में इसमें भारतीय सेना के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े फोटो और वीडियो होने की बात सामने आई है. अब विशेषज्ञ इस डिजिटल सामग्री की फॉरेंसिक जांच कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ड्रोन ने किन इलाकों की रिकॉर्डिंग की और इसके पीछे किस नेटवर्क की भूमिका हो सकती है.


सीमा पर ड्रोन गतिविधियां बनी चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में सीमा पार से ड्रोन गतिविधियों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पहले इनका इस्तेमाल हथियार और नशीले पदार्थ पहुंचाने के लिए किया जाता था, लेकिन अब निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिशें भी बढ़ी हैं. छोटे आकार और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले ऐसे ड्रोन सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन रहे हैं, हालांकि सेना ने कई प्रयासों को समय रहते नाकाम किया है.

जांच जारी, सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत

सुरक्षा एजेंसियां अब बरामद ड्रोन और उसके उपकरणों की गहन जांच कर रही हैं. उड़ान मार्ग, नियंत्रण प्रणाली और संभावित स्रोत का पता लगाने के लिए तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है. इसके साथ ही सीमा क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, गश्त और एंटी-ड्रोन तंत्र को और मजबूत किया गया है. अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के जरिए ऐसे खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है.