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अमरनाथ यात्रियों पर पाक की ISI की नजर, खालिस्तानियों के साथ मिलकर रच रहा 'नापाक' साजिश?

Amarnath Yatra: अमरनाथ यात्रियों पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की 'नापाक' नजर है. एक अधिकारी के मुताबिक, ISI, खालिस्तानियों के साथ मिलकर रच 'नापाक' साजिश रच रहा है. खुफिया जानकारी के अनुसार, ISI तीर्थयात्रियों को निशाना बनाकर अमरनाथ यात्रा को बाधित करने की प्लानिंग कर रहा है. फिलहाल, अमरनाथ यात्रा सुचारू रूप से चल रही है.

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Amarnath Yatra: खुफिया एजेंसियों को हाल ही में जानकारी मिली है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI खालिस्तानी आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के साथ मिलकर अमरनाथ यात्रा को बाधित करने की साजिश रच रही है. खुफिया जानकारी के अनुसार, अमरनाथ यात्रा के तीर्थयात्रियों को निशाना बनाकर यात्रा में बाधा डालने के लिए  ISI पंजाब के आतंकी नेटवर्क, कट्टरपंथी ग्रुप 'बब्बर खालसा' का सहारा ले रही है.

इसके अलावा, ऐसी चिंताजनक रिपोर्टें हैं कि ISI पंजाब और दिल्ली में भाजपा नेताओं और हिंदू नेताओं को निशाना बनाने के लिए भी बब्बर खालसा इंटरनेशनल का इस्तेमाल कर रही है. हाल ही में एक खुफिया अलर्ट में जून में पठानकोट के पास एक गांव में आधुनिक हथियारों से लैस संदिग्ध आतंकवादियों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया था. इस खुफिया सूचना के बाद पठानकोट में सात संदिग्ध व्यक्तियों के देखे जाने के बाद तत्काल तलाशी अभियान चलाया गया.

पंजाब में हिंदू प्रचारक को मिली थी धमकी वाली चिट्ठी

एक और परेशान करने वाली घटना में, पंजाब में एक हिंदू प्रचारक को हाल ही में खालिस्तानी समर्थक एक समूह से धमकी भरा पत्र मिला था. मामले की जानकारी के बाद पंजाब पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी और इस धमकी के पीछे शामिल अपराधियों की तलाश शुरू कर दी है.

पिछले 28 दिनों से चल रही अमरनाथ यात्रा में 4 लाख से ज़्यादा श्रद्धालु हिस्सा ले चुके हैं. गुफा मंदिर में बर्फ़ का एक शिवलिंग है जो चांद के चरणों के साथ घटता-बढ़ता रहता है. भक्तों का मानना ​​है कि ये संरचना भगवान शिव की पौराणिक शक्तियों का प्रतीक है.

अमरनाथ गुफा कश्मीर में समुद्र तल से 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. श्रद्धालु या तो पारंपरिक दक्षिण कश्मीर (पहलगाम) मार्ग से या उत्तर कश्मीर (बालटाल) मार्ग से गुफा मंदिर तक पहुंचते हैं. पहलगाम से गुफा मंदिर की दूरी 48 किलोमीटर है और तीर्थयात्रियों को मंदिर तक पहुंचने में चार से पांच दिन लगते हैं. वहीं, बालटाल से गुफा मंदिर की दूरी 14 किलोमीटर है और तीर्थयात्रियों को दर्शन करने और आधार शिविर में लौटने में एक दिन लगता है.