Padma Shri 2026: दो वैज्ञानिकों की अनकही कहानी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पद्म श्री से करेंगी सम्मानित
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में दो प्रमुख वैज्ञानिकों डॉ. शुभा वेंकटेश अय्यंगार और डॉ. कुमारासामी थंगराज को पद्म श्री पुरस्कार प्रदान करेंगी.
जब राष्ट्रपति भवन की शानदार दीवारें 23 जून 2026 को गवाह बनेंगी, तब दो वैज्ञानिकों की मेहनत चमक उठेगी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु डॉ. शुभा वेंकटेश अय्यंगार और डॉ. कुमारासामी थंगराज को पद्म श्री से सम्मानित करेंगी. यह सम्मान सिर्फ पदक नहीं, बल्कि उन अनगिनत रातों की कहानी है जिनमें इन दोनों ने भारत को दुनिया के मुकाबले मजबूत बनाने के लिए काम किया.एक तरफ आसमान को छूती उड़ानें और रक्षा प्रौद्योगिकी, दूसरी तरफ हमारे जीन और स्वास्थ्य के रहस्य. दोनों वैज्ञानिक अलग अलग क्षेत्रों में देश की सेवा कर रहे हैं, लेकिन लक्ष्य एक है -आत्मनिर्भर और स्वस्थ भारत.
डॉ. शुभा वेंकटेश अय्यंगार: स्वदेशी विज्ञान की प्रणेता
डॉ. शुभा वेंकटेश अय्यंगार ने 46 साल तक सीएसआईआर नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज, बेंगलुरु में योगदान दिया. जूनियर रिसर्च फेलो के रूप में 1974 में शुरूआत करने वाली इस वैज्ञानिक ने नागरिक उड्डयन, रक्षा और पदार्थ विज्ञान में क्रांतिकारी प्रौद्योगिकियां विकसित कीं. 2020 तक सीएसआईआर की प्रमुख वैज्ञानिक रहीं डॉ. शुभा का काम न सिर्फ नए शोध मार्ग खोलता है बल्कि छात्रों और युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित भी करता है. उनका जीवन स्वदेशी नवाचार और राष्ट्रप्रेम का जीता जागता उदाहरण है.
डॉ. कुमारासामी थंगराज: जीनोम की दुनिया के अन्वेषक
डॉ. कुमारासामी थंगराज सीएसआईआर सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, हैदराबाद में सीएसआईआर भटनागर फेलो हैं. जनसंख्या और चिकित्सा आनुवंशिकी के क्षेत्र में उनके योगदान को विश्व भर में सराहा जाता है. वे जीनोम इंडिया और बाल चिकित्सा दुर्लभ आनुवंशिक रोग जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मिशनों के समन्वयक हैं. माइटोकॉन्ड्रियल विकारों के निदान और इलाज के लिए उन्होंने डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाने के लिए सोसाइटी फॉर माइटोकॉन्ड्रियल रिसर्च एंड मेडिसिन की स्थापना की.
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राष्ट्रीय सम्मान का महत्व
ये पद्म श्री पुरस्कार उन हजारों अनाम वैज्ञानिकों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो चुपचाप देश की प्रगति में जुटे रहते हैं. डॉ. शुभा और डॉ. थंगराज के कार्य भारत को तकनीकी और स्वास्थ्य क्षेत्र में मजबूत बना रहे हैं. राष्ट्रपति द्वारा मिलने वाला यह सम्मान युवा पीढ़ी को विज्ञान की ओर आकर्षित करने वाला भी है.
प्रेरणा का नया अध्याय
दोनों वैज्ञानिकों की यात्रा बताती है कि समर्पण और दूरदृष्टि से कोई भी क्षेत्र बदला जा सकता है. 23 जून को राष्ट्रपति भवन में होने वाले इस समारोह में न सिर्फ दो व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा, बल्कि पूरे देश के वैज्ञानिक समुदाय का उत्साह बढ़ेगा.